Gauhati
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने नागांव के लुटुमरी रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में रह रहे लोगों को 30 दिनों के भीतर अपना सामान हटाकर वैकल्पिक ठिकाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि तय समयसीमा के बाद भी यदि लोग क्षेत्र खाली नहीं करते हैं, तो प्रशासन उन्हें हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। साथ ही, असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) को भी 30 दिन बाद बिजली आपूर्ति बंद करने का आदेश दिया गया है।
जस्टिस देवाशीष बरुआ की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि वे वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत ‘वन में रहने वाली अनुसूचित जनजाति’ या ‘अन्य पारंपरिक वन निवासी’ की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मतदाता सूची में नाम, बिजली कनेक्शन या पंचायत प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज़ रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में निवास के कानूनी अधिकार का प्रमाण नहीं माने जा सकते।
कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा सार्वजनिक हित से जुड़ा संवैधानिक दायित्व है, जो निजी दावों से अधिक महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 48A के अनुरूप बताया गया।
अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि खाली कराई गई वन भूमि का उपयोग किसी भी गैर-वन गतिविधि के लिए न होने दिया जाए। साथ ही वन विभाग को उस भूमि पर प्रभावी पुनर्वनीकरण (री-फॉरेस्टेशन) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
