GIRIDIH: रिश्वतखोर बर्खास्त कर्मी की 28 दिन में हो गई वापसी, सदर अस्पताल में नियुक्ति पर उठे सवाल

GIRIDIH

गिरिडीह के सदर अस्पताल में एक कर्मी की दोबारा नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में हटाए गए कर्मी को महज 28 दिनों के भीतर आयुष्मान मित्र के पद पर नियुक्त किए जाने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

स्टिंग ऑपरेशन में रिश्वत लेते पकड़ा गया था कर्मी

जानकारी के अनुसार, चैताडीह मातृ-शिशु केंद्र में कार्यरत एमएसडब्ल्यू प्रदीप मंडल को जनता जागरुकता संघ द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के नाम पर 2500 रुपये रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद किया गया था। बताया गया कि 100-100 रुपये के 25 नोटों का लेन-देन रिकॉर्ड हुआ था। मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह ने 4 मई को कार्रवाई की अनुशंसा की थी, जिसके आधार पर 6 मई को संबंधित निजी एजेंसी ने प्रदीप मंडल और एक अन्य कर्मी को कार्यमुक्त कर दिया था।

आयुष्मान मित्र चयन सूची में फिर आया नाम

विवाद तब गहरा गया जब 4 जून को जारी आयुष्मान मित्र चयन सूची में प्रदीप मंडल का नाम फिर शामिल पाया गया। अस्पताल उपाधीक्षक (डीएस) के हस्ताक्षर से जारी सूची में उन्हें चयनित अभ्यर्थियों में स्थान दिया गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन के भीतर निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे।

सिविल सर्जन ने जताई आपत्ति

सिविल सर्जन डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह ने इस नियुक्ति पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि उन्हें इस निर्णय की जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हों और जिसके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा स्वयं उन्होंने की हो, उसे दोबारा नियुक्त किया जाना उचित नहीं है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठ रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप में हटाए गए कर्मी को आखिर किस आधार पर दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई। मामले ने सदर अस्पताल की प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं।

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