RANCHI
विकसित भारत जी ग्राम जी योजना और मनरेगा को लेकर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार के समक्ष कई अहम मुद्दे उठाए। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देशभर के राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मनरेगा से जुड़े अनुभव साझा किए।
झारखंड की ओर से बोलते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सबसे पहले बकाया राशि के भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि राज्य में मैटेरियल मद के 950 करोड़ रुपये, मजदूरी के 300 करोड़ रुपये और प्रशासनिक मद के 36 करोड़ रुपये लंबित हैं। उन्होंने मांग की कि इनका जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की रफ्तार बनी रहे।
मंत्री ने कहा कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण मनरेगा मजदूरों में निराशा और उदासीनता बढ़ रही है। इसका सीधा असर ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान मजदूरी दर महंगाई के मुकाबले काफी कम है, इसलिए इसे बढ़ाना समय की न्यायसंगत मांग है, जिस पर सभी राज्य सहमत हैं।
बैठक के दौरान विकसित भारत जी ग्राम जी योजना पर भी मंत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस योजना पर राज्यों से पहले पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। साथ ही, इसमें राज्यों की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी तय करना झारखंड जैसे राज्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ साबित होगा। उनके अनुसार, यह फैसला राज्य की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है।
मंत्री ने बताया कि इसी कारण झारखंड विधानसभा ने मनरेगा को जारी रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि मनरेगा के तहत 100 दिनों के बजाय 150 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा 60 दिनों के अवकाश संबंधी नियमों में भी लचीलापन लाने की आवश्यकता बताई गई।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार का संकट गहरा सकता है और पलायन की समस्या भी बढ़ सकती है। अंत में मंत्री ने केंद्र सरकार से अपील की कि झारखंड के हिस्से की बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि मजदूरों के साथ न्याय हो सके और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रह सके।
