86 लोगों की जांच, एआई आधारित हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन से हुई स्क्रीनिंग, तंबाकू निषेध जागरूकता अभियान के जरिए युवाओं और महिलाओं को दिया गया स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश
BOKARO
देश को टीबी मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में चल रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान को शुक्रवार को सेक्टर-12 स्थित जयपालनगर में नई ऊर्जा मिली। आसस द्वारा संचालित आदर्श हाई स्कूल परिसर में आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर में आधुनिक तकनीक और जनजागरूकता का प्रभावी संगम देखने को मिला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एआई आधारित हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन, बलगम जांच और अन्य स्वास्थ्य परीक्षणों के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान का अभियान चलाया। शिविर में जयपालनगर, बिरसा बस्ती, हनुमान नगर समेत आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे 86 लोगों की जांच की गई। राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आयोजित इस शिविर में डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों, पूर्व टीबी मरीजों एवं उनके परिजनों, धूम्रपान और शराब सेवन करने वालों, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों तथा कम बीएमआई वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उनकी स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने पोर्टेबल चेस्ट एक्स-रे मशीन के माध्यम से जांच कर संदिग्ध मरीजों के बलगम के नमूने भी संग्रहित किए, ताकि समय रहते रोग की पुष्टि कर उपचार शुरू किया जा सके।

घर-घर तक पहुंच रही अत्याधुनिक जांच सुविधा :
शिविर में मौजूद एसटीएस संजय कुमार सिंह ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए अब स्वास्थ्य विभाग तकनीक का व्यापक उपयोग कर रहा है। एआई आधारित हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों की मदद से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधा पहुंचाई जा रही है। उन्होंने बताया कि टीबी स्क्रीनिंग के साथ-साथ लोगों का ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन, गैर-संचारी रोग (एनसीडी) तथा सांस संबंधी बीमारियों की भी निःशुल्क जांच की गई।
छिपे मरीजों की पहचान और मौतों में कमी लाना है लक्ष्य :
उन्होंने बताया कि 100 दिवसीय अभियान का उद्देश्य केवल मरीजों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन मामलों तक पहुंचना है जो अब तक स्वास्थ्य व्यवस्था की नजर से दूर हैं। समय पर जांच और उपचार के माध्यम से संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना तथा टीबी से होने वाली मौतों में कमी लाना इस अभियान की प्राथमिकता है। इसके लिए हाई-रिस्क क्षेत्रों में लगातार विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
टीबी मरीजों को मिल रही पोषण सहायता :
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी की पुष्टि होने पर मरीजों को उपचार अवधि के दौरान केंद्र सरकार की निक्षय पोषण योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उपचार को अधिक प्रभावी बनाना है।
तंबाकू निषेध अभियान से भी दिया गया स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश :
वहीं शिविर के दौरान विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सहिया साथी काकली चार ने युवाओं एवं महिलाओं को तंबाकू सेवन और धूम्रपान से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि तंबाकू छोड़ना केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा का संकल्प है। जागरूकता और समय पर परामर्श के माध्यम से ही तंबाकू जनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।कार्यक्रम में ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़ों की बीमारियों तथा तंबाकू से जुड़ी अन्य घातक स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी दी गई। सहिया सुनीता देवी एवं लक्ष्मी देवी ने लोगों से तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।
इनकी रही सराहनीय भूमिका :
शिविर को सफल बनाने में एसटीएस संजय कुमार सिंह, नीरज कुमार वर्मा, चंदन कुमार मुखर्जी, आईसीटीसी राहुल कुमार, एलटी रोहित कुमार, हराधन कुमार, सहिया साथी काकली चार, सहिया सुनीता देवी, लक्ष्मी देवी, योगो पूर्ती, अरुण कुमार सिंह, विजय एक्का, संजय कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मियों और सामाजिक सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

