NEW DELHI
ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को एक बार फिर बंद करने की घोषणा कर दी है। यह फैसला उस समय आया है जब Donald Trump ने एक दिन पहले ही ईरान के खिलाफ नाकेबंदी को “पूरी ताकत” के साथ जारी रखने की बात कही थी। ईरानी सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका द्वारा बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखने के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, अब यह जलडमरूमध्य पूरी तरह सशस्त्र बलों के सख्त नियंत्रण में है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका ईरान आने-जाने वाले जहाजों की पूरी स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, तब तक इस अहम समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध जारी रहेगा। हाल ही में लेबनान में संघर्ष-विराम के बाद इसे खोलने की उम्मीद बनी थी, लेकिन अब स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई है।
अमेरिका की ओर से सख्त रुख जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस समझौता नहीं करता, तब तक दबाव की नीति जारी रहेगी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि कड़ा रुख ही तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने का एकमात्र तरीका है। हालांकि, इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है।
समुद्री तनाव के बीच ईरान ने आंशिक राहत देते हुए अपने हवाई क्षेत्र को सीमित रूप से खोल दिया है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, देश के पूर्वी हिस्से से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय मार्ग और कुछ चुनिंदा हवाई अड्डों पर उड़ानें फिर से शुरू कर दी गई हैं, जिससे ट्रांजिट उड़ानों को कुछ राहत मिली है।
इस संघर्ष की मानवीय और आर्थिक कीमत भी लगातार बढ़ रही है। 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद अब तक ईरान में करीब 3,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 2,290 से अधिक, इजरायल में 23 और अमेरिका के 13 सैनिकों की जान गई है। खाड़ी देशों में भी एक दर्जन से अधिक लोग हताहत हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
