अमेरिका के AI प्रतिबंध से भारत में हड़कंप, भारतीय उद्योग जगत ने दिया बड़े राष्ट्रीय AI मिशन पर जोर  

CENTRAL DESK

अमेरिका द्वारा उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल्स तक पहुंच पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद भारत में स्वदेशी AI क्षमताओं को मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। उद्योग जगत के कई दिग्गजों ने सरकार से AI अनुसंधान, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर निर्माण और घरेलू AI मॉडल विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि विदेशी तकनीकों पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

यह बहस उस समय और तेज हो गई जब अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी सरकारी निर्देशों का हवाला देते हुए अपने प्रमुख AI मॉडल्स ‘Fable 5’ और ‘Mythos 5’ तक विदेशी नागरिकों की पहुंच सीमित करने की घोषणा की। इस कदम ने भारतीय उद्योग जगत में चिंता पैदा कर दी है और देश में एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर AI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है।

आरीन कैपिटल के चेयरमैन और इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी टी.वी. मोहनदास पई ने केंद्र सरकार से अधिक प्रभावी राष्ट्रीय AI कार्यक्रम शुरू करने की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को AI क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए बड़े वित्तीय निवेश, निजी क्षेत्र की भागीदारी और दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए। पई ने डीप-टेक और AI अनुसंधान के लिए वार्षिक 50 हजार करोड़ रुपये के फंड तथा क्लाउड, हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष वित्तीय सहायता योजना की भी वकालत की।

इंफोसिस के सह-संस्थापक Kris Gopalakrishnan ने भी AI क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को UPI की तर्ज पर अपने AI मॉडल विकसित करने चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक हित में डेटा उपयोग, ओपन-सोर्स मॉडल, अगली पीढ़ी के AI हार्डवेयर और डेटा संप्रभुता से जुड़े नियामक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

वहीं, Sridhar Vembu ने कहा कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि तकनीक अब राष्ट्रीय संप्रभुता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने भारतीय संस्थानों को छोटे और ओपन-सोर्स AI मॉडल अपनाने तथा घरेलू तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने की सलाह दी। दूसरी ओर, Anthropic ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी सरकार के निर्देशों का पालन कर रही है, हालांकि कंपनी का मानना है कि सीमित तकनीकी कमजोरियों के आधार पर किसी व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे मॉडल को वापस लेना उचित नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारत के लिए एक चेतावनी की तरह है, जो देश को AI क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने, घरेलू नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

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