GUAHATI
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने घोषणा की है कि डाक विभाग अगले दो से तीन महीनों के भीतर असम में ड्रोन-आधारित डाक एवं पार्सल डिलीवरी सेवा शुरू करेगा। इस पहल का उद्देश्य राज्य के दूरदराज़, पहाड़ी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डाक सेवाओं की पहुंच को तेज़, सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाना है। केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में सफल परीक्षण के बाद अब इस आधुनिक सेवा का विस्तार पूर्वोत्तर राज्यों तक कर रही है।
डाक विभाग ने हिमाचल प्रदेश और असम में ड्रोन डिलीवरी के लिए करीब 150 संभावित रूटों की पहचान की है। असम में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम बस्तियों तक डाक पहुंचाना लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से डिलीवरी समय में उल्लेखनीय कमी आने और लोगों तक आवश्यक सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह परियोजना औपचारिक रूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी-रेहरधर रूट पर शुरू की गई थी, जो देश का पहला सक्रिय ड्रोन डाक मार्ग बना। सिंधिया ने बताया कि ग्रामीण डाक सेवकों और डाक सहायकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया गया। कर्मचारियों ने दूरस्थ और कठिन इलाकों में तेज़ तथा भरोसेमंद डिलीवरी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया था।
ड्रोन आधारित डिलीवरी सेवा केवल तेज़ परिवहन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा यह पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली मानी जा रही है, जिससे पारंपरिक परिवहन पर निर्भरता कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से असम के दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और डाक सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर बनेगी।
डाक विभाग के अनुसार, असम जैसे राज्य में जहां बाढ़ और कठिन भौगोलिक स्थिति अक्सर अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने में बाधा बनती हैं, वहां ड्रोन तकनीक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इससे न केवल संचार व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समावेशन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
