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भारत के समुद्री कर्मियों के लिए पश्चिम एशिया का समुद्री क्षेत्र लगातार खतरनाक होता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक तेल टैंकर पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अब ओमान के तट पर एक अन्य भारतीय नाविक की मृत्यु की खबर सामने आई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में ओमान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर हुए सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तीनों भारतीयों के निधन की पुष्टि की थी। इस घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए समुद्री जहाजों पर हो रहे हमलों को रोकने और जवाबदेही तय करने की मांग की।
इसी बीच रविवार को एक और दुखद घटना सामने आई। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की कि एमटी सेलेस्टियल नामक पोत पर कार्यरत भारतीय नाविक निशांत उर्थानाथन की ओमान के दुक्म पोर्ट में चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण मृत्यु हो गई। दूतावास ने बताया कि वह जहाज प्रबंधन कंपनी और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है तथा पार्थिव शरीर को जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
समुद्री संगठनों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव, सैन्य गतिविधियों और आपातकालीन सहायता में आने वाली बाधाओं के कारण नाविकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने भी हाल की घटनाओं पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र जांच, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री कर्मियों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। क्षेत्र में अमेरिका-ईरान तनाव और लगातार हो रही सैन्य कार्रवाइयों का सीधा असर व्यापारिक जहाजों और उन पर कार्यरत हजारों भारतीय नाविकों पर पड़ रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं।
तीन भारतीय नाविकों की मौत और अब ओमान तट पर एक अन्य भारतीय की मृत्यु ने समुद्री सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। परिजनों और समुद्री संगठनों की मांग है कि सरकार प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराए तथा खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस पहल करे।
