PAKUD
Dr. Misfika ने राज्य सरकार के “आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार” कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए पाकुड़ प्रशासन पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सरकार भले ही जनता की समस्याओं के समाधान का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
डॉ. मिसफिका ने कहा कि गणेश मंडल जैसे कई लोग वर्षों से अपनी अधिग्रहित जमीन के मुआवजे और मूलभूत अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बावजूद इसके उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति की जमीन विकास कार्यों के लिए ले ली गई हो, अगर वही व्यक्ति अपने हक के लिए सालों तक भटकता रहे, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।
‘आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उदासीनता ने तोड़ी उम्मीद’
भाजपा नेता ने कहा कि आर्थिक संकट, मानसिक पीड़ा और प्रशासनिक उदासीनता ने ऐसे परिवारों की उम्मीदों को धीरे-धीरे खत्म कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकुड़ जिला प्रशासन आम लोगों की समस्याओं पर गंभीर पहल करने के बजाय उन्हें अनदेखा करता नजर आ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि नेता प्रतिपक्ष के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीसी से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग
डॉ. मिसफिका ने Pakur District Administration से आग्रह किया कि गणेश मंडल की अधिग्रहित जमीन के लंबित मुआवजे का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी संबंधित विभागों को निर्देश देकर वर्षों से लंबित मामलों का मानवीय आधार पर त्वरित समाधान कराया जाए।
उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपने ही अधिकार के लिए दर-दर भटकने की नौबत नहीं आनी चाहिए। यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जनता को समय पर न्याय और उनका अधिकार मिले।
