RANCHI
झारखंड में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस नेता सह समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने विधायक Saryu Roy पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरयू राय बाहर से आकर झारखंड में राजनीति कर रहे हैं और उन्हें राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की पूरी जानकारी नहीं है।
बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार के संकल्प में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिस जिले में मगही, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएं क्षेत्रीय भाषा के रूप में बोली जाती हैं, वहां स्थानीय लोगों के लिए उसी आधार पर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति, नियोजन और प्रतियोगी परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाषा विवाद को समझने के लिए झारखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना को समझना जरूरी है। इस विषय पर कैबिनेट स्तर पर चर्चा हो चुकी है और इसके लिए समिति भी बनाई गई थी। तिर्की ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के इस मुद्दे पर बयानबाजी कर लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि झारखंड में हर 30 से 40 किलोमीटर पर भाषा और संस्कृति बदल जाती है। रांची जिले में कुड़ुख, खड़िया और मुंडारी जैसी जनजातीय भाषाएं बोली जाती हैं, जबकि नागपुरी, पंचपरगनिया और बंगाली भी क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में प्रचलित हैं।
उन्होंने बताया कि लातेहार में मगही और भोजपुरी, पलामू में नागपुरी, मगही और भोजपुरी, गढ़वा में नागपुरी, मगही और भोजपुरी, जबकि जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ में अंगिका व्यापक रूप से बोली जाती है।
बंधु तिर्की ने कहा कि राजभाषा विभाग द्वारा पांच जनजातीय और चार क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता दी गई है। इन भाषाओं को संरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मगही, भोजपुरी और अंगिका कई जिलों में स्थानीय बोली के रूप में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2011 के सरकारी संकल्प संख्या 1632 के अनुसार जिस जिले में जो भाषा बोली जाती है, वहां उसी जिले के लोगों को नियुक्ति परीक्षाओं में शामिल करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थानीय भाषाओं और स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
