साहिबगंज के उधवा में 4 साल से जारी अवैध खुदाई, खतरे में नदी; CM से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

Sahibganj

साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड में गंगा नदी के किनारे लगातार हो रही अवैध बालू और मिट्टी की खुदाई को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। गांव के लोगों ने इस संबंध में झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को लिखित आवेदन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब चार वर्षों से गंगा नदी के नदी तल और फ्लडप्लेन क्षेत्र में संगठित तरीके से अवैध खुदाई की जा रही है, जिसे स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, अवैध रूप से निकाली गई मिट्टी और बालू को बिना किसी माइनिंग लीज, पर्यावरणीय स्वीकृति या वैधानिक अनुमति के खुलेआम ईंट-भट्ठों और चिमनी फैक्ट्रियों को बेचा जा रहा है। इस दौरान ओवरलोड ट्रकों की तेज आवाजाही गांव की सड़कों और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है।

आवेदन में कहा गया है कि भारी वाहनों के कारण ग्रामीण सड़कों, पुलियों और रास्तों की हालत खराब हो चुकी है। तेज रफ्तार ट्रकों से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल बना हुआ है। बिना ढंके ट्रकों से उड़ने वाली धूल के कारण सांस संबंधी बीमारियां और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि धूल और प्रदूषण के कारण खेतों की उर्वरता घट रही है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है और छोटे किसानों की आजीविका संकट में पड़ गई है। गंगा नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ के कारण नदी की चौड़ाई बढ़ रही है, तट कमजोर हो रहे हैं और बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी के पास बसे कई गांवों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

प्रेस रीलीज में यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा पहले गंगा तट को बचाने के लिए पत्थर और बोल्डर लगाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन स्थानीय दलालों और अवैध खनन से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर डराने-धमकाने और प्रभाव का इस्तेमाल कर इस काम को रुकवा दिया। इससे नदी तट सुरक्षा योजना अधूरी रह गई।

ग्रामीणों ने गंगा डॉल्फिन जैसे संरक्षित जलीय जीवों पर भी गंभीर खतरे की बात उठाई है। यह इलाका वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-1 में शामिल गंगेटिक डॉल्फिन का प्राकृतिक आवास माना जाता है। अवैध खुदाई, शोर और गाद के कारण जलीय जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रभावित क्षेत्र फरक्का बैराज के बेहद करीब है, जो राष्ट्रीय महत्व की संरचना है। यहां नदी तल में किसी भी तरह की छेड़छाड़ से अंतरराज्यीय और राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खुदाई के दौरान दो जेसीबी मशीनें और करीब 500 ट्रैक्टर ट्रिप्स के जरिए लगभग तीन किलोमीटर लंबी सड़क को घेरकर लोडिंग की गई, जिससे आम लोगों की आवाजाही बाधित हुई। एक जेसीबी मशीन का रजिस्ट्रेशन नंबर JH-18 K-4177 बताया गया है।

ग्रामीणों ने राज्य सरकार से अवैध बालू खनन पर तत्काल रोक लगाने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और गंगा नदी व आसपास के गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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