NEW DELHI
केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार और मजदूर संगठनों के विरोध के बाद आखिरकार नए श्रम अधिनियमों को पूरी तरह लागू कर दिया है। सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा और कर्मचारियों को कम से कम एक साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही तय समय से अधिक काम लेने पर ओवरटाइम भुगतान का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
सरकार ने चारों श्रम कोड के नियमों को आधिकारिक राजपत्र में जारी कर दिया है, जिसके बाद इन कानूनों को पूरी तरह लागू माना जा रहा है। ये चार कोड हैं – मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता 2020। जानकारी के अनुसार ये प्रावधान 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माने जाएंगे।
मजदूरों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा और तय कार्य समय
नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी के कार्य घंटे इस तरह तय किए जाएंगे कि कुल साप्ताहिक कार्य अवधि 48 घंटे से अधिक न हो। कर्मचारियों को साप्ताहिक छुट्टी देने और अतिरिक्त काम के बदले ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने का भी प्रावधान किया गया है।
सरकार का दावा है कि इन कानूनों से देशभर के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी और यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी सुनिश्चित होगी। इसके अलावा नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य किया गया है और 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी जोड़ी गई है। महिलाओं को अलग-अलग शिफ्ट में बराबर काम, समान वेतन और समान अवसर देने का प्रावधान भी नए ढांचे में शामिल किया गया है।
29 पुराने कानूनों की जगह लेंगे चार श्रम कोड
केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार बड़े श्रम कोड तैयार किए हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य श्रम व्यवस्था को आधुनिक बनाना, कारोबार करने में आसानी बढ़ाना और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देना है।
नियमों का मसौदा 30 दिसंबर 2025 को विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से राय लेने के लिए जारी किया गया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इन्हें अंतिम रूप देकर लागू कर दिया गया है।
नए कानूनों में नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों के लिए नेशनल रीस्किलिंग फंड बनाने का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि प्रभावित कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
सरकार का मानना है कि नए श्रम कोड लागू होने से मजदूरों की सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा, उद्योगों के संचालन में आसानी होगी और देश में श्रमिक हितों के अनुकूल बेहतर कार्य माहौल तैयार हो सकेगा।
