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पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल को पश्चिम बंगाल में नई BJP सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में BJP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार सत्ता हासिल की है।
1990 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी मनोज अग्रवाल ने विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा अनिवार्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का नेतृत्व किया था। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में अग्रवाल की भूमिका को बेहद अहम माना था।
सूत्रों के अनुसार, चुनावी तैयारियों और मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से संचालित कराने में उनकी प्रशासनिक क्षमता ने नौकरशाही के भीतर उनकी मजबूत पहचान बनाई। माना जा रहा है कि इसी भरोसे और अनुभव के आधार पर उन्हें राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार द्वारा जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि मौजूदा मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल का प्रधान रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है। नारियाला 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं और उन्हें चुनाव आयोग की सिफारिश पर पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव बनाया गया था। उनकी नियुक्ति के बाद नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य के शीर्ष नौकरशाह के पद से हटाया गया था।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया विधानसभा चुनावों में BJP ने तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, लंबे समय तक राज्य की सत्ता में रही TMC महज 80 सीटों तक सिमट गई। BJP की इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव तेजी से किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणाम केंद्रित बनाने के लिए अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जता रही है। मनोज अग्रवाल की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
