एक करोड़ की PCC सड़क से उड़ रही धूल, पिपरवार की अशोक विहार कॉलोनी में आक्रोश



घटिया निर्माण पर सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज


ULGULAN DESK

सीसीएल पिपरवार क्षेत्र की आवासीय अशोक विहार कॉलोनी में एक करोड़ से अधिक की लागत से बनी पीसीसी सड़क अब कॉलोनीवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। सड़क निर्माण के कुछ ही समय बाद उससे सफेद धूल उड़ने लगी है, जिससे लोग खासे नाराज़ हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़क से उड़ने वाली धूल घरों के भीतर, यहां तक कि बेडरूम तक पहुंच रही है।

कॉलोनीवासियों का आरोप है कि पीसीसी ढलाई में बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। जहां मानक के अनुसार छह इंच मोटी ढलाई होनी चाहिए थी, वहां एक से दो इंच तक ही कंक्रीट डाली गई। इतना ही नहीं, सीमेंट की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है, जिससे सड़क की सतह उखड़ने लगी है और कंक्रीट बाहर निकल रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान ही उन्होंने कार्य की गुणवत्ता और निर्माण शैली पर आपत्ति जताई थी। कॉलोनीवासियों ने मांग की थी कि पुरानी सड़क को पूरी तरह हटाकर सही ढंग से नई सड़क बनाई जाए, ताकि बारिश का पानी क्वार्टरों में न घुसे। लेकिन आरोप है कि उनकी बातों को नजरअंदाज कर रात के समय ढलाई कराई गई। इसका नतीजा यह हुआ कि सड़क अपेक्षित ऊंचाई तक नहीं बनी और कई घरों में पानी घुसने की समस्या शुरू हो गई।

अब धूल उड़ने की समस्या सामने आने के बाद विभागीय अधिकारी और संवेदक सड़क पर झाड़ू लगवाने और पानी का छिड़काव कर अस्थायी लीपापोती में जुटे हैं। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि यह सब खामियों को छुपाने की कोशिश है। उनका कहना है कि इस घटिया निर्माण के लिए जितना जिम्मेदार संवेदक है, उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी सीविल विभाग के अधिकारियों की बनती है, जिनकी निगरानी में यह कार्य हुआ।

सूत्रों के मुताबिक कॉलोनीवासियों के दबाव के बाद सीविल विभाग के वरीय अधिकारियों ने संवेदक का बिल रोकने का निर्देश दिया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ बिल रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि एस्टीमेट से अधिक दर पर ठेका दिया गया और शुरू से ही निर्माण कार्य में मिलीभगत और सेटिंग चल रही थी।

कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि एक करोड़ से अधिक की लागत से बनी इस पीसीसी सड़क के निर्माण की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर गहन जांच कराई जाए, ताकि दोषी अधिकारियों और संवेदकों की जिम्मेदारी तय हो सके और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

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