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राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन झारखंड विधानसभा परिसर में राजनीतिक गतिविधियां पूरे दिन चरम पर रहीं। महागठबंधन की ओर से घोषित उम्मीदवार बैजनाथ राम और प्रणव झा ने विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान गठबंधन दलों के कई विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
दूसरी ओर, उद्योगपति परिमल नाथवानी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। उनके नामांकन को लेकर राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा। विधानसभा परिसर में विभिन्न दलों के नेताओं और विधायकों की आवाजाही से माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आया।
भाजपा विधायकों के साथ पहुंचे नाथवानी
नामांकन से पहले भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल के आवास पर भाजपा विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में परिमल नाथवानी की मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। बैठक के दौरान उन्होंने भाजपा नेताओं से मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक समाप्त होने के बाद नाथवानी भाजपा विधायकों के साथ विधानसभा पहुंचे और अपना नामांकन दाखिल किया। भाजपा नेताओं के साथ उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे आगामी मतदान में संभावित समर्थन के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
बाबूलाल मरांडी के बयान ने बढ़ाई चर्चा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिमल नाथवानी को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नाथवानी पहले भी झारखंड का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और उनके कार्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मरांडी ने कहा कि किसी भी चुनाव में केवल संख्या बल ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उम्मीदवार के काम और योगदान का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक परिमल नाथवानी के समर्थन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाबूलाल मरांडी के बयान को राजनीतिक विश्लेषक नाथवानी के पक्ष में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
समर्थन को लेकर बना हुआ है सस्पेंस
राज्यसभा चुनाव को लेकर अब सभी की नजरें राजनीतिक दलों की अंतिम रणनीति और मतदान के दिन होने वाले समीकरणों पर टिकी हैं। महागठबंधन अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है, वहीं परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी ने चुनावी गणित में नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने तक राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी रहने की संभावना है।
