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आदिवासी हो समाज महासभा का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन–2026 शनिवार को आदिवासी कल्याण केंद्र, किरीबुरु में शुरू हुआ। अधिवेशन के पहले दिन 17 जनवरी को दियूरी धनुर्जय लागुरी द्वारा बोंगा बुरु के साथ विधिवत उद्घाटन किया गया। इसके बाद महासभा का झंडा फहराया गया और हो समाज की सामूहिक प्रार्थना गोवारी के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा।
अधिवेशन के दूसरे दिन आयोजित प्रतिनिधि सभा में महिलाओं के पैतृक संपत्ति अधिकार को लेकर अहम और चर्चा में रहने वाला फैसला लिया गया। सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि हो समाज में महिलाओं को पैतृक संपत्ति में जन्मजात अधिकार नहीं होगा। हालांकि, परंपरा के तहत विशेष परिस्थितियों में पहले से चले आ रहे अधिकार यथावत बने रहेंगे।
प्रतिनिधि सभा में वक्ताओं ने कहा कि हो समाज की सामाजिक व्यवस्था परंपराओं और रीति-रिवाजों पर आधारित रही है और उसी के अनुरूप संपत्ति के अधिकार तय किए जाते हैं। समाज का मानना है कि इस निर्णय से पारंपरिक सामाजिक संतुलन बना रहेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि महिलाओं की भूमिका को केवल संपत्ति से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, बल्कि परिवार, संस्कृति और सामाजिक जीवन में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

भाग कर विवाह की प्रक्रिया पर स्पष्ट रुख
प्रतिनिधि सभा में ‘केया–केपेया आंदी’ यानी भाग कर विवाह की परंपरा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सभा ने यह निर्णय लिया कि बाला प्रक्रिया के दौरान लड़की और लड़के के घर जाकर विवाह संपन्न कराने की वर्तमान प्रवृत्ति अमान्य होगी। हो समाज की परंपरा के अनुसार बाला के समय न तो लड़का लड़की के घर जाता है और न ही लड़की लड़के के घर।
हालांकि, यह भी तय किया गया कि भाग कर विवाह की परंपरा पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके लिए ससंग–सुनुम और आदिंग–हेबे आदेर की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद जब अजिहनर के रूप में लड़की पक्ष के लोग लड़के के घर आएंगे, तभी बाला को मान्यता मिलेगी।
मारंग बोंगा परंपरा को सहेजने की पहल
अधिवेशन में मारंग बोंगा परंपरा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि हो समाज में हर किली या गोत्र का अपना इतिहास होता है, जिसे मारंग बोंगा के रूप में पूजा जाता है। कई किलियों में यह परंपरा समाप्ति की कगार पर है। इसे देखते हुए महासभा ने सभी किलियों से मारंग बोंगा से जुड़े पूजा-पाठ और विधानों का दस्तावेजीकरण कर महासभा के पास जमा करने का आह्वान किया।
महासभा अध्यक्ष मुकेश बिरुवा ने बिरुवा किली के मारंग बोंगा का विस्तृत इतिहास साझा किया और बताया कि बिरुवा किली के लोग वर्तमान में 84 गांवों में बसे हैं। उन्होंने इसे किली के प्रवास और सामाजिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज बताया।
अंतर्जातीय विवाह और रिंग सेरेमनी पर रोक
प्रतिनिधि सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि अंतर्जातीय विवाह को हो समाज में मान्यता नहीं दी जाएगी। ऐसे विवाहों को किसी भी पारंपरिक पूजा-पाठ या आदिंग में स्थान नहीं मिलेगा। इसके साथ ही रिंग सेरेमनी को भी हो समाज की विवाह परंपरा के विरुद्ध बताते हुए उस पर रोक लगाने का फैसला किया गया।
इस अधिवेशन में सोमा कोड़ा, चैतन्य कुंकल, बामिया बारी, छोटेलाल तामसोय, माधव चंद्र कोड़ा, रोया राम चंपिया, गोपी लागुरी, रमेश लागुरी, बलभद्र बिरुली, श्याम बिरुवा, अमर बिरुवा, जयराम पाट पिंगुवा, भूषण लागुरी, पुतकर लागुरी, अमरसिंह सुंडी, नीलिमा पुरती, गीता लागुरी, पदमुनि लागुरी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
महासभा के ये फैसले आने वाले दिनों में हो समाज के भीतर व्यापक चर्चा का विषय बने रहेंगे।
