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अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने सरकारी अधिकारियों के दबाव में अदानी समूह की कंपनियों में लगभग 3.9 अरब डॉलर का निवेश किया। रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि यह निवेश एक विशेष योजना के तहत किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इसे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बताया और इस मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) और लोक लेखा समिति (पीएसी) से कराने की मांग की।
एलआईसी ने तुरंत बयान जारी कर आरोपों को “निराधार और गलत” करार दिया। कंपनी ने कहा कि उसके निवेश निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं और किसी बाहरी दबाव का असर नहीं होता। अदानी समूह ने भी कहा कि एलआईसी का निवेश किसी सरकारी योजना का हिस्सा नहीं था और पक्षपात का दावा भ्रामक है।
बीबीसी ने भी अपनी रिपोर्ट में इस मामले को उठाते हुए लिखा कि नीति आयोग की तरफ़ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
वॉशिंगटन पोस्ट का दावा
शनिवार सवेरे प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि जब अदानी ग्रुप पर कर्ज़ का दबाव बढ़ा और विदेशी बैंक निवेश में हिचकिचा रहे थे, तब भारत सरकार ने मदद के लिए योजना बनाई।
अख़बार के अनुसार, दस्तावेज़ दिखाते हैं कि वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के अधिकारियों ने एलआईसी के अदानी समूह में निवेश का प्रस्ताव तैयार किया। 30 मई को अदानी ग्रुप ने बताया कि इस पूरे बॉन्ड को एलआईसी ने ही खरीदा। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि यह सरकारी योजना का सिर्फ़ एक छोटा हिस्सा था।
अदानी समूह का जवाब:
अदानी समूह ने एलआईसी के निवेश को किसी सरकारी योजना से जोड़ने से इनकार किया और कहा कि निवेश से उन्हें रिटर्न मिला, पक्षपात के दावे गलत हैं।
एलआईसी का बयान:
एलआईसी ने कहा कि उसके निवेश निर्णय स्वतंत्र हैं और किसी भी बाहरी दबाव का इसमें कोई रोल नहीं होता। बयान में कहा गया कि रिपोर्ट का उद्देश्य एलआईसी की प्रक्रिया और प्रतिष्ठा को प्रभावित करना है।
विपक्ष और सार्वजनिक बहस
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एलआईसी के माध्यम से 33,000 करोड़ रुपये सार्वजनिक धन का गलत इस्तेमाल हुआ। पार्टी ने कहा कि निवेश जबरन कराया गया, जबकि एलआईसी पहले ही अदानी के शेयरों में नुकसान झेल चुकी थी।
तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा और पत्रकार सागरिका घोष ने भी रिपोर्ट को साझा कर मोदी सरकार पर अदानी को मदद देने का आरोप लगाया।
अदानी समूह पर पहले भी लगे आरोप
अमेरिका की संस्थाओं DOJ और SEC ने अदानी समूह पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। हिंडनबर्ग रिसर्च ने 2023 में दावा किया कि गौतम अदानी ने शेयर हेरफेर के ज़रिए अरबों डॉलर कमाए। भारत की नियामक संस्था सेबी ने हिंडनबर्ग को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अदानी समूह के वित्तीय मामलों को लेकर यह बहस अब अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन चुकी है।
