RU : आदिवासी छात्र संघ ने कुलपति नियुक्ति और क्लस्टर सिस्टम का किया विरोध

Ranchi

राजधानी रांची के जेकब हॉल में सोमवार को ‘आदिवासी छात्र संघ’ की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें रांची विश्वविद्यालय (RU) में कुलपति नियुक्ति और संकल्प संख्या 902 के तहत लागू किए जा रहे शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। छात्र नेताओं ने इसे आदिवासी एवं मूलवासी छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल निर्णय वापस लेने की मांग की।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रोफेसर सरोज शर्मा की कुलपति पद पर नियुक्ति का संगठन कड़ा विरोध करता है। उनका आरोप है कि NIOS की चेयरपर्सन रहते हुए उन पर एक दलित कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने और जातीय टिप्पणी करने का मामला दर्ज है। इसी मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा FIR संख्या 863/2024 दर्ज की गई है। छात्र नेताओं का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को विश्वविद्यालय के शीर्ष पद पर बैठाना सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

प्रेस वार्ता में नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की भावना के अनुरूप किसी भी आरोपी व्यक्ति को शैक्षणिक संस्थानों के सर्वोच्च पद पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे आदिवासी और दलित छात्रों की गरिमा को ठेस पहुंचती है और राज्य की सामाजिक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

संघ ने सरकार की ‘क्लस्टरिंग ऑफ कॉलेजेस’ नीति पर भी तीखा विरोध जताया। नेताओं ने कहा कि संकल्प संख्या 902 के तहत कॉलेजों को क्लस्टर में बांटकर विषयों का केंद्रीकरण किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और आदिवासी छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। उदाहरण देते हुए कहा गया कि रांची के पांच प्रमुख कॉलेजों को एक समूह में बांटकर अलग-अलग विषय निर्धारित किए जा रहे हैं। इससे छात्रों को अपने मनपसंद विषय की पढ़ाई के लिए अलग-अलग कॉलेजों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ेंगे।

संघ ने आरोप लगाया कि पदों के युक्तिकरण और सरेंडर की प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अनदेखी की जा रही है। नेताओं ने इसे संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत दिए गए आरक्षण अधिकारों का उल्लंघन बताया। कार्यकारी अध्यक्ष दया राम ने कहा कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में स्थानीय और योग्य विद्वानों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि बाहरी और विवादित चेहरों को।

उन्होंने यह भी कहा कि पदों के पुनर्गठन की प्रक्रिया छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि पद समाप्त करने की मंशा से चलाई जा रही है। इससे आने वाले समय में उच्च शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो सकती है और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसरों से वंचित होना पड़ सकता है।

संघ की प्रमुख मांगें

  1. प्रोफेसर सरोज शर्मा की कुलपति नियुक्ति तत्काल रद्द कर स्थानीय और स्वच्छ छवि वाले विद्वान को नियुक्त किया जाए।
  2. क्लस्टर सिस्टम को तुरंत समाप्त किया जाए ताकि छात्रों को अपने कॉलेज में सभी विषयों की पढ़ाई मिल सके।
  3. संकल्प संख्या 902 के तहत पदों के पुनर्गठन पर रोक लगाकर आरक्षण रोस्टर के अनुसार पारदर्शी नियुक्तियां की जाएं।
  4. एससी/एसटी एक्ट के आरोपी व्यक्तियों को शैक्षणिक संस्थानों के शीर्ष पदों से दूर रखा जाए।

इस प्रेस वार्ता में केंद्रीय समिति अध्यक्ष अमृत मुंडा, कार्यकारी अध्यक्ष दया राम, अखिलेश पाहन, अरविंद टोप्पो, अमृत टोप्पो, राकेश रोशन और अभिषेक रजक समेत संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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