सोनम वांगचुक ने दी चेतावनी: भारत के युवा वर्ग की अनदेखी हुई तो बन सकते हैं नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात

NEW DELHI

लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने छात्रों के आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार को गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की लगातार अनदेखी की गई और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो युवाओं का लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से भरोसा उठ सकता है, जिसकी परिणति पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश जैसी अस्थिर परिस्थितियों में हो सकती है।

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल हैं वांगचुक

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन में सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। आंदोलनकारी राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई जा रही है।

वांगचुक ने इस आंदोलन के समर्थन में अनशन शुरू किया है। चिकित्सकों के अनुसार मंगलवार सुबह उनका ब्लड शुगर स्तर 66 तक पहुंच गया, जिसे स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक माना जा रहा है।

“सत्य और अहिंसा मेरा मार्ग है”

सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका संघर्ष पूरी तरह सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति भूखा रहना नहीं चाहता, लेकिन जब परिस्थितियां मजबूर करती हैं, तब न्याय के लिए त्याग करना आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

वांगचुक ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सामने आए पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों को बेहद गंभीर बताया। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास का संकट पैदा हो गया है, जिसका सबसे अधिक असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ रहा है।

उन्होंने हाल के महीनों में परीक्षा संबंधी तनाव और असफलताओं से जुड़ी छात्र आत्महत्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक संकट भी है।

संसद के मानसून सत्र से उम्मीद

उन्होंने कहा कि केवल मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि व्यापक नीतिगत और विधायी सुधार आवश्यक हैं। आगामी मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेश बढ़ाने को लेकर ठोस पहल की जानी चाहिए।

वांगचुक ने कहा कि यदि शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर निवेश नहीं किया गया तो विकसित भारत-2047 का सपना अधूरा ही रहेगा।

लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखने की अपील

सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि युवा पीढ़ी लोकतंत्र और शांतिपूर्ण आंदोलनों से अपना भरोसा न खो दे। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण तरीकों को सम्मान और परिणाम नहीं मिलेंगे, तो उग्र और हिंसक रास्तों को बढ़ावा मिलेगा, जो देश के लिए खतरनाक होगा।

उन्होंने सरकार से अपील की कि वह संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करे तथा शांतिपूर्ण विरोधों को सुनकर उनका सम्मान करे।

आंदोलन को बताया अनुशासित और शांतिपूर्ण

वांगचुक ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को नागरिक जिम्मेदारी और अनुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक अत्यधिक गर्मी के बावजूद भोजन, पानी और स्वच्छता की व्यवस्था संभाल रहे हैं और प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण बना हुआ है। उन्होंने आंदोलनकारियों से भी आग्रह किया कि वे कटुता के बजाय संवाद और सद्भाव का मार्ग अपनाएं, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

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