केंद्र के खनिज कानून पर CM हेमंत सोरेन का हमला, बोले- झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा जिसे पूरा देश देखेगा

खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की तो हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?”

RANCHI 

खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर केंद्र ने यह कानून वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।

हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में कहा कि खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?” उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा से विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने का आरोप लगाते हुए इसे झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय बताया।

झारखंड के हाथ-पैर काटने का काम किया

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए झारखंड के हाथ-पैर काटने का काम किया है। उन्होंने इसे “काला बिल” बताते हुए कहा कि इससे झारखंड के विकास और भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। हेमंत सोरेन के मुताबिक झारखंड केंद्र का यह सौतेला व्यवहार स्वीकार नहीं करेगा।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के खनिज अधिकारों पर टैक्स लगाने की शक्ति को मान्यता दी थी। इसके बाद झारखंड ने खनिज-युक्त जमीन पर सेस लगाने की व्यवस्था की थी। अब केंद्र के नए कानून में राज्यों की ओर से खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त जमीन पर अलग से टैक्स, सेस या लेवी लगाने की शक्ति को सीमित किया गया है।

खनिज सेस से मिलने वाले पैसे पर भी असर

झारखंड सरकार के लिए खनिज सेस सिर्फ अतिरिक्त कर नहीं, बल्कि राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राज्य को 2024-25 में खनिज सेस से करीब 1,380 करोड़ रुपये की आय हुई थी।

हेमंत सोरेन ने दावा किया कि अगर खनिज से अतिरिक्त राजस्व जुटाने का रास्ता बंद हुआ तो इसका असर राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के सामने वित्तीय चुनौती खड़ी हो सकती है।

हालांकि, इन योजनाओं के बंद होने की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री का दावा राजनीतिक आरोप के तौर पर सामने आया है। किसी योजना के भविष्य पर वास्तविक असर राज्य के राजस्व, केंद्र से मिलने वाले संसाधनों और अन्य वित्तीय स्रोतों पर निर्भर करेगा।

हर जिले से पंचायत तक विरोध की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगा। अगर केंद्र सरकार ने कानून वापस नहीं लिया तो प्रत्येक जिला, प्रखंड, पंचायत और शहर में विरोध किया जाएगा।

हेमंत सोरेन ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र ने झारखंड और झारखंडियों के हक-अधिकार वापस नहीं किए तो राज्य निर्णायक और ऐतिहासिक फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटेगा।

अब मुद्दा सिर्फ सेस का नहीं, अधिकार का

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच खनिज संसाधनों पर अधिकार और राजस्व बंटवारे का सवाल खड़ा कर दिया है। झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए यह कानून महत्वपूर्ण है।

झारखंड सरकार का तर्क है कि खनिज संपदा राज्य की जमीन से निकलती है और खनन से पर्यावरण, विस्थापन तथा स्थानीय बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले असर का सामना भी राज्य को करना पड़ता है। ऐसे में खनिज से मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व पर राज्य का अधिकार होना चाहिए।

वहीं केंद्र का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों द्वारा खनिजों पर अलग-अलग टैक्स और सेस लगाने से पूरे देश में खनिजों की लागत और कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसी विवाद के बीच अब हेमंत सोरेन ने आंदोलन का ऐलान कर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने का संकेत दिया है।

झारखंड के मुख्यमंत्री का संदेश साफ है—खनिज अधिकारों का सवाल अब केवल राजस्व का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि इसे राज्य के अधिकार और संघीय ढांचे की लड़ाई के रूप में उठाया जाएगा।

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