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दिल्ली: AAP को बड़ा झटका, सात राज्यसभा सांसदों ने छोड़ा साथ
Delhi में आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा सियासी झटका सामने आया है। Arvind Kejriwal की पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसकी जानकारी Raghav Chadha ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी और पार्टी पर तीखा हमला बोला।
इसके जवाब में Sanjay Singh ने भी प्रेस वार्ता कर पार्टी छोड़ने वालों की आलोचना की और इसे भाजपा के “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा बताया।
अशोक मित्तल का नाम चर्चा में, 10 दिन में बदला घटनाक्रम
इस पूरे घटनाक्रम में Ashok Kumar Mittal का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्हें हाल ही में राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बनाया गया था, लेकिन महज 10 दिनों के भीतर उन्होंने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए।
बताया जा रहा है कि हाल ही में Enforcement Directorate ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। मित्तल पंजाब में Lovely Professional University के चांसलर हैं और लवली ग्रुप से जुड़े अन्य व्यवसाय भी संचालित करते हैं।
ED छापेमारी के बाद सियासी कदम पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार 2 अप्रैल को मित्तल को डिप्टी लीडर बनाया गया और 10 दिन के भीतर ED की कार्रवाई हुई। इसके बाद उन्होंने बिना देरी के AAP से इस्तीफा दे दिया और भाजपा का रुख कर लिया।
AAP नेताओं का आरोप है कि यह सब “ऑपरेशन लोटस” के तहत दबाव बनाकर कराया गया है, हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख सामने आया है।
एंटी-डिफेक्शन कानून पर भी बहस तेज
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह कदम कानूनी रूप से वैध है। एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद अगर दूसरी पार्टी में विलय के लिए सहमत होते हैं, तभी वे अयोग्यता से बच सकते हैं।
राघव चड्ढा ने दावा किया है कि राज्यसभा में AAP के 10 में से 7 सांसद उनके साथ हैं, जो दो-तिहाई के आंकड़े को पार करता है।
इन सांसदों ने छोड़ी AAP
राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, Harbhajan Singh, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल ने पार्टी से किनारा कर लिया है।
इनमें से ज्यादातर सांसद पंजाब से जुड़े हैं और राज्य की राजनीति में अहम भूमिका रखते हैं, जिससे इस सियासी घटनाक्रम का असर आगे भी देखने को मिल सकता है।
