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केंद्र सरकार ने कोलकाता मेट्रो के नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर यानी ब्लू लाइन के इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 671.72 करोड़ रुपये की बड़ी मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट का मकसद मेट्रो सेवाओं को ज्यादा तेज, सुरक्षित और अधिक फ्रीक्वेंसी वाला बनाना है।
फिलहाल ब्लू लाइन पर पीक ऑवर में हर पांच मिनट पर ट्रेनें चलती हैं, लेकिन मेट्रो प्रशासन का लक्ष्य है कि 2030 तक इस अंतर को घटाकर करीब ढाई मिनट कर दिया जाए। माना जा रहा है कि यह अपग्रेडेशन कोलकाता मेट्रो नेटवर्क के लिए बड़ा बदलाव साबित होगा।
नए ट्रैक्शन सबस्टेशन से बढ़ेगी क्षमता
मंजूर की गई राशि में से 291.06 करोड़ रुपये सात नए ट्रैक्शन सबस्टेशन बनाने में खर्च किए जाएंगे। वहीं, बाकी 380.66 करोड़ रुपये ट्रांसफॉर्मर, रेक्टिफायर, हाई-स्पीड सर्किट ब्रेकर और केबल नेटवर्क जैसे पुराने इलेक्ट्रिकल सिस्टम को बदलने में लगाए जाएंगे।
मेट्रो इंजीनियरों के मुताबिक, ट्रेनों को कम अंतराल पर चलाने के लिए हर स्टेशन पर ट्रैक्शन सबस्टेशन होना जरूरी है। अभी ब्लू लाइन पर 26 स्टेशन हैं, लेकिन ट्रैक्शन सबस्टेशन की संख्या कम होने के कारण परिचालन क्षमता सीमित बनी हुई है।
नई योजना के तहत कालीघाट, नेताजी भवन, मैदान, एस्प्लेनेड, एमजी रोड, शोभावाजार, बेलगाछिया और दमदम के बीच अतिरिक्त सबस्टेशन तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा चांदनी चौक और गीतांजलि स्टेशन के पास बन रहे दो नए सबस्टेशन जुलाई के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद है।
1980 के दशक की तकनीक को बदला जाएगा
ब्लू लाइन देश का सबसे पुराना मेट्रो नेटवर्क माना जाता है, जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। मौजूदा सिस्टम अब भी पांच रिसीविंग सबस्टेशन पर निर्भर है, जो CESC से 33KV हाई-वोल्टेज बिजली लेकर उसे 11KV तक कम करते हैं। इसके बाद ट्रैक्शन सबस्टेशन उसे 750 वोल्ट डायरेक्ट करंट में बदलकर तीसरी रेल तक पहुंचाते हैं, जिससे ट्रेनें चलती हैं।
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि पुराने सिस्टम की क्षमता अब लगभग पूरी हो चुकी है। पहले के ट्रैक्शन सबस्टेशन हाई-वोल्टेज बिजली संभालने में सक्षम नहीं थे, लेकिन नई तकनीक के साथ अब सीधे 33KV सप्लाई को संभाला जा सकता है। इसी वजह से पुराने रिसीविंग सबस्टेशन को धीरे-धीरे हटाने की योजना बनाई जा रही है।
2030 तक ढाई मिनट में मिलेगी ट्रेन
मेट्रो प्रशासन के मुताबिक, अपग्रेडेशन का काम अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है। अंडरग्राउंड सेक्शन के बड़े हिस्से को पहले ही आधुनिक बनाया जा चुका है, जबकि टॉलीगंज से कवि सुभाष तक का एलिवेटेड सेक्शन अभी अपग्रेड होना बाकी है।
इस पूरी योजना के बाद ब्लू लाइन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, यात्रियों को कम इंतजार करना पड़ेगा और भीड़भाड़ में भी राहत मिलने की उम्मीद है। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि 2030 तक कोलकाता मेट्रो का यह कॉरिडोर देश के सबसे आधुनिक और हाई-फ्रीक्वेंसी नेटवर्क में शामिल हो सकता है।
