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मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक नए खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिकी सेना को साफ चेतावनी दी है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की कोशिश न करे। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी में फंसे जहाज़ों को सुरक्षित बाहर निकालने की बात कही है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ईरान की सख्त चेतावनी: ‘प्रवेश किया तो हमला होगा’
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा पूरी तरह उसके नियंत्रण में है। कमान प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी विदेशी सशस्त्र बल, खासकर अमेरिकी सेना, को इस क्षेत्र में घुसने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारिक जहाज़ों और तेल टैंकरों को ईरानी सेना के साथ तालमेल बनाकर ही इस मार्ग से गुजरना होगा। बिना समन्वय के किसी भी तरह की गतिविधि को उकसावे के रूप में देखा जाएगा और उस पर कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका का मिशन: फंसे जहाज़ों को निकालने की तैयारी
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका खाड़ी में फंसे जहाज़ों और उनके क्रू को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि इस योजना की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अमेरिका उन देशों की मदद करेगा जिनके जहाज़ इस जलमार्ग में फंसे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि युद्ध शुरू हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है और कई जहाज़ों पर भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी होने लगी है। ऐसे में यह मिशन मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेल आपूर्ति पर असर, वैश्विक बाजार में उथल-पुथल
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहां तेल की कीमतों में 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। ऊर्जा संकट के चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी सैन्य तैनाती और बढ़ती चिंता
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका 15,000 से अधिक सैनिकों, 100 से ज्यादा युद्धक विमानों, युद्धपोतों और ड्रोन के साथ इस मिशन में उतरेगा।
अमेरिकी कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि यह अभियान क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां तनाव को और बढ़ा सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय चिंता: हजारों नाविक फंसे, समाधान की मांग तेज
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के अनुसार, इस संघर्ष के कारण सैकड़ों कमर्शियल जहाज़ और करीब 20,000 नाविक इस जलमार्ग में फंसे हुए हैं।
शिपिंग और तेल उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक व्यापार पर और गंभीर हो सकता है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है, ताकि सामान्य समुद्री आवाजाही को बहाल किया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक संतुलन का अहम केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यहां की स्थिति दुनिया की दिशा तय कर सकती है।
