Ranchi
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 23 दिसंबर को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में पेसा नियमावली को मंजूरी मिलने के बाद पूरे झारखंड में खुशी का माहौल है। लंबे समय से पेसा को लागू करने की मांग उठ रही थी, जिसे अब जाकर कैबिनेट की स्वीकृति मिली है।
इस फैसले से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को अधिक अधिकार और मजबूती मिलेगी। स्थानीय स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया सशक्त होगी और जनजातीय स्वशासन को नई दिशा मिलेगी। पेसा नियमावली की मंजूरी पर ग्राम प्रधानों, मुखियाओं और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएं
कान्हु मुर्मू, मुखिया, केराडूंगरी पंचायत (पूर्वी सिंहभूम) ने कहा कि पेसा नियमावली लागू होना जनजातीय क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक कदम है। इससे स्वशासन की भावना मजबूत होगी।
योगेंद्र भगत, घाघरा (गुमला) ने इसे पंचायतों के सर्वांगीण विकास की दिशा में अहम बताया और मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
पीर परगना दिवाकर सोरेन (सरायकेला-खरसावां) ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद पेसा को मंजूरी मिली है, जिससे अनुसूचित क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी।
अनुसूचित क्षेत्र मुखिया संघ के अध्यक्ष राम प्रसाद बड़ाईक (गुमला) ने इसे मुख्यमंत्री की ओर से बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इससे विकास को नया आयाम मिलेगा।
मुखिया मती सुखमति मार्डी (गम्हरिया, सरायकेला-खरसावां) ने कहा कि पेसा नियमावली से अनुसूचित क्षेत्र अब विकास के नए रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
संगीता कुमारी, बुरूडीह पंचायत (सरायकेला-खरसावां) ने कहा कि पेसा कानून से ग्रामसभा मजबूत होगी और जनजातीय समुदाय को उनके अधिकार और सम्मान सुनिश्चित होंगे।
