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पीएम के बयान से बढ़ा विवाद, शिक्षकों का तीखा जवाब
जादवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक विवाद तेज हो गया है। नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावी सभा में यूनिवर्सिटी को “राष्ट्र-विरोधी नारों का अड्डा” बताए जाने पर शिक्षकों ने कड़ा विरोध जताया है। शिक्षकों ने इसे संस्थान की गरिमा पर हमला बताया और कहा कि यह देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को बदनाम करने की कोशिश है।
JUTA का पलटवार, निजी संस्थानों को बढ़ावा देने का आरोप
Jadavpur University Teachers Association (JUTA) ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार निजी संस्थानों, जैसे Jio Institute- को बढ़ावा देकर सरकारी विश्वविद्यालयों को कमजोर कर रही है।
एसोसिएशन ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने “इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस” के लिए सभी मानदंड पूरे किए, फिर भी उसे उचित मान्यता नहीं मिली।
NIRF रैंकिंग और ऐतिहासिक विरासत का हवाला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पीएम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह यूनिवर्सिटी National Institutional Ranking Framework (NIRF) में लगातार शीर्ष स्थान पर रही है, ऐसे में इसे अपमानित करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
JUTA के सचिव पार्थ प्रतीम रॉय ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की जड़ें स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी हैं और यह सामाजिक न्याय व अकादमिक उत्कृष्टता का प्रतीक रही है।
फंडिंग संकट और UGC को लेकर चिंता
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने Rashtriya Uchchatar Shiksha Abhiyan (RUSA) के तहत मिलने वाला फंड जारी नहीं किया, जिससे यूनिवर्सिटी आर्थिक संकट से जूझ रही है।
साथ ही University Grants Commission (UGC) को कमजोर करने की कथित कोशिशों पर भी चिंता जताई गई। उनका कहना है कि इससे सरकारी संस्थानों की फंडिंग पर असर पड़ेगा।
केंद्रीय मंत्री का पलटवार, राज्य सरकार पर निशाना
वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य सरकार इन संस्थानों की स्थिति सुधारने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात के लिए राज्य सरकार भी जिम्मेदार है।
