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महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने से पहले ही किसानों के सामने खाद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राज्य के कई जिलों में किसान उर्वरक की तलाश में दुकानों और गोदामों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है। हालात ऐसे हैं कि कई किसानों को या तो सीमित मात्रा में खाद दी जा रही है या फिर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। दूसरी ओर, खाद की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। बुवाई का समय नजदीक होने के कारण किसान आशंकित हैं कि यदि जल्द पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध नहीं हुआ तो फसलों की उत्पादकता पर सीधा असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में किसानों ने बयां की परेशानी
बीबीसी हिंदी में श्रीकांत बंगाले की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के धाराशिव, जालना और छत्रपति संभाजीनगर सहित कई इलाकों में किसान पिछले दो महीनों से खाद की तलाश कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष जिन उर्वरकों की कीमत करीब 1,800 से 1,900 रुपये प्रति बोरी थी, उनकी कीमत अब बढ़कर 2,200 से 2,300 रुपये तक पहुंच गई है। कई दुकानों के बाहर डीएपी और यूरिया का स्टॉक समाप्त होने के बोर्ड लगे हुए हैं, जबकि कुछ दुकानों पर प्रशासन के निर्देश चस्पा किए गए हैं कि दूसरे जिलों के किसानों को खाद न बेची जाए। किसानों का आरोप है कि जरूरत के मुकाबले उन्हें बहुत कम मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
दो महीने से खाद की तलाश में भटक रहे किसान
छत्रपति संभाजीनगर के किसान भानुदास थोम्ब्रे बताते हैं कि वह करीब दो महीने से खाद की तलाश में हैं। कभी खाद उपलब्ध होती है तो कभी नहीं। कई बार बीज और उर्वरक दोनों की कमी का सामना करना पड़ता है। वहीं जालना जिले के किसानों का कहना है कि उन्हें छह बोरी की आवश्यकता होने पर सिर्फ दो बोरी दी जा रही है, जबकि कुछ किसानों को 30 बोरी की मांग के बदले केवल 10 बोरी खाद मिल रही है। इससे खेती की तैयारी प्रभावित हो रही है।
नियमों और आपूर्ति संकट के बीच फंसे खाद विक्रेता
उर्वरक विक्रेताओं का भी कहना है कि अप्रैल और मई के दौरान कई प्रमुख उर्वरकों की आपूर्ति बेहद सीमित रही। उनका दावा है कि प्रशासनिक निगरानी और वितरण संबंधी नियमों के कारण वे किसानों को मांग के अनुरूप खाद नहीं दे पा रहे हैं। कुछ दुकानदारों ने यह भी बताया कि निर्धारित सीमा से अधिक खाद बेचने पर कार्रवाई का डर बना रहता है, जिसके चलते वे अतिरिक्त बिक्री से बच रहे हैं।
कृषि विभाग ने बताया पर्याप्त है खाद का भंडार
हालांकि कृषि विभाग खाद की कमी के दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रहा है। विभाग का कहना है कि क्षेत्र में लाखों मीट्रिक टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है और यदि किसी दुकान पर कोई विशेष खाद नहीं मिल रही है तो दूसरी दुकानों में उसकी उपलब्धता हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार किसानों को उनकी भूमि, फसल और आवश्यकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है ताकि किसी प्रकार की जमाखोरी या अनावश्यक खरीदारी को रोका जा सके।
वैश्विक तनाव और युद्ध का भी पड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने भी उर्वरक आपूर्ति को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण कच्चे माल की उपलब्धता तथा परिवहन लागत प्रभावित हुई है। समुद्री माल ढुलाई और बीमा खर्च बढ़ने से उर्वरक उत्पादन और वितरण पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य और बुवाई का रकबा बड़ा रहता है तो आने वाले हफ्तों में खाद की मांग और बढ़ सकती है।
केंद्र सरकार ने उपलब्धता को लेकर किया दावा
केंद्र सरकार का दावा है कि देश में खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और उत्पादन तथा आयात दोनों जारी हैं। सरकार ने उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाने और कालाबाजारी रोकने के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली भी शुरू की है। हालांकि जमीनी स्तर पर कई किसान तकनीकी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। आधार सत्यापन, ओटीपी और दस्तावेजों के मिलान में आ रही दिक्कतों के कारण ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
समय पर खाद नहीं मिली तो फसलों पर पड़ेगा असर
फिलहाल किसान मानसून की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उससे पहले खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि बुवाई के महत्वपूर्ण समय में पर्याप्त उर्वरक नहीं मिला तो इसका असर सीधे उत्पादन और उनकी आय पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों तक समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद पहुंचाने की है।
