रोजगार, महंगाई और संविधान की रक्षा को लेकर सरकार पर बरसे दीपांकर भट्टाचार्य

विशद कुमार

भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने आज 1 जुलाई को बिहारशरीफ, नगरनौसा और भोजपुर के बेलौटी गाँव के दौरे के बाद आरा में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि बिहार में सुशासन की जगह पुलिस राज, बुलडोजर राज और फर्जी मुठभेड़ों का दौर चल रहा है। मॉब लिंचिंग, जाति पूछकर हत्याएं, दलितों-पिछड़ों और गरीबों पर बढ़ते हमले तथा पुलिस दमन लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर हमला हैं। इन्हीं सवालों को लेकर 4 जुलाई को पूरे बिहार में राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया जाएगा।

आज माले महासचिव के नेतृत्व में पार्टी की एक उच्चस्तरीय टीम ने सुबह बिहारशरीफ के गंजपर जाकर राजगीर में पीट-पीटकर हत्या किए गए दो दलित युवकों—श्रवण पासवान और पिंटू पासवान—के परिजनों से मुलाकात की।

 इसके बाद टीम नगरनौसा पहुँची, जहाँ डिग्री कॉलेज के स्थानांतरण के विरोध में आंदोलन कर रहे नागरिकों पर हुए पुलिस दमन के पीड़ितों से बातचीत की।

इसके उपरांत टीम भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बेलौटी गाँव पहुँची और भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर पूरे गाँव का दौरा किया। टीम में पार्टी के राज्य सचिव कुणाल, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा, अमर और संतोष सहर शामिल थे।

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज बिहार और देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून के राज को बचाने की है। सरकार कानून और न्याय की जगह एनकाउंटर, बुलडोजर और दमन को शासन का मॉडल बनाना चाहती है।

विधानसभा से लेकर सड़क तक जनता इन सवालों को पूरी ताकत से उठाएगी और इस मॉडल को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बेलौटी गाँव के दौरे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भरत तिवारी की बहन ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने और पूरे मामले को मैनेज करने में लगी है। जाँच की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और सरकार का रवैया संदेह पैदा करता है। उन्होंने मांग की कि प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच हो तथा जाँच पूरी होने तक संबंधित लोगों को तत्काल निलंबित किया जाए।

उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। चाहे भरत तिवारी हों, राजगीर के दलित युवक हों या किसी भी समुदाय का कोई पीड़ित—सभी को समान न्याय मिलना चाहिए। आज स्थिति यह है कि कहीं जाति पूछकर हत्या की जा रही है तो कहीं मंदिर में प्रवेश करने पर लोगों को पीट-पीटकर मार दिया जा रहा है। ऐसी घटनाएँ सभ्य समाज पर कलंक हैं।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर महंगाई चरम पर है, मनरेगा को लगातार कमजोर किया जा रहा है और नए श्रम कानूनों सहित कई कानून मेहनतकश जनता के अधिकारों पर हमला कर रहे हैं। नौजवान रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बेरोजगारी और पेपर लीक मिल रहा है। दिल्ली में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के नेता शिक्षा और रोजगार के सवाल पर अनशन पर बैठे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि राम के नाम पर मंदिर बनाने का नारा देकर करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब चंदा और भूमि घोटालों के आरोप सामने आ रहे हैं। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में “दाम बाँधो, काम दो”, “बुलडोजर राज खत्म करो”, “कानून का राज स्थापित करो” और “लोकतंत्र बचाओ” के सवालों पर व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। अगस्त महीने से इन मुद्दों पर राज्यव्यापी आंदोलन का नया चरण शुरू होगा।

उन्होंने बिहार की जनता से अपील की कि 4 जुलाई के राज्यव्यापी विरोध दिवस में बड़ी संख्या में भाग लेकर मॉब लिंचिंग, फर्जी मुठभेड़ों, बुलडोजर राज, पुलिस दमन, बेरोजगारी, महंगाई तथा संविधान-विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।

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