नक्सल समस्या का समाधान बातचीत से हो, एनकाउंटर से नहीं – CPIML

हेमंत सरकार नक्सलियों से संवाद की पहल करे, लोकतांत्रिक रास्ता अपनाने की मांग

RANCHI 


भाकपा (माले) झारखंड ने हेमंत सरकार से राज्य में माओवादियों से बातचीत की पहल करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि नक्सल समस्या का समाधान सैन्य या दमनकारी नीति से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के ज़रिये ही संभव है।

भाकपा (माले) ने स्पष्ट किया कि ‘नक्सलियों के सफाये’ की नीति को झारखंड में लागू करना आदिवासी समाज के साथ ऐतिहासिक अन्याय और दमन को और गहरा करेगा। पार्टी के अनुसार, बीते वर्ष और इस वर्ष की शुरुआत में बोकारो और सिंहभूम क्षेत्रों में मुठभेड़ों के नाम पर बड़ी संख्या में तथाकथित नक्सलियों की मौत हुई है, जिसे स्वीकार करना राज्य तंत्र की हिंसा को वैध ठहराने जैसा होगा।

पार्टी ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही इन मुठभेड़ों से मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों का गंभीर हनन हो रहा है। यह संवैधानिक और गणतांत्रिक मूल्यों को दरकिनार कर सत्ता के बल प्रयोग को बढ़ावा देने का संकेत है।

भाकपा (माले) ने इन सभी मुठभेड़ों की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक स्वतंत्र जांच टीम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। पार्टी ने दोहराया कि वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक उसूलों में विश्वास करती है और हेमंत सरकार से आग्रह करती है कि नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए संवाद की ठोस पहल की जाए। ये जानकारी राज्य सचिव, भाकपा (माले), झारखंड ने जारी की है।

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