Ranchi
रांची से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आगामी जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए अलग सरना धर्म कोड की मांग की है। अपने पत्र में सोरेन ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के विकास में आंकड़ों और वैज्ञानिक तथ्यों के महत्व को भली-भांति समझते हैं और किसी भी राष्ट्र के संतुलित विकास के लिए तथ्य आधारित नीति ही सबसे प्रभावी माध्यम होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही और विस्तृत आंकड़े ही नीतियों को सही दिशा देते हैं, अन्यथा असंतुलित विकास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि वर्ष 2027 की जनगणना की प्रक्रिया में राज्य सरकार पूरी तरह सहयोग कर रही है और उन्होंने स्वयं भी सेल्फ एन्यूमरेशन के माध्यम से इस अभियान में भाग लिया है। इस दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जनगणना के पहले चरण में घर के मुखिया से संबंधित बुनियादी जानकारी ली जा रही है, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़े सवाल शामिल हैं, जबकि दूसरे चरण में प्रत्येक नागरिक के व्यक्तिगत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
सोरेन ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने पहले भी वर्ष 2021 की जनगणना के संदर्भ में सरना धर्म की पृष्ठभूमि और आदिवासी समाज के उससे गहरे भावनात्मक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए अलग धर्म कोड देने का अनुरोध किया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनगणना के दूसरे चरण में धर्म से जुड़े कॉलम में राज्य की भावना, विधानसभा के संकल्प और आदिवासी समाज की मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उन आंकड़ों के गहन विश्लेषण का आधार भी है, जिसका उपयोग नीति निर्माण, कल्याणकारी योजनाओं, संवैधानिक संरक्षण और प्रशासनिक निर्णयों में किया जाता है। किसी भी समाज की पहचान उसके सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं से होती है, और यही पहलू उसके विकास को भी प्रभावित करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन उसकी आदिवासी पहचान के आधार पर हुआ है और यहां की नीतियां व योजनाएं स्थानीय लोगों की भावनाओं के अनुरूप बनाई जाती हैं। ऐसे में जनगणना की प्रक्रिया में इन सभी आयामों को शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश तकनीकी रूप से उन्नत हो चुका है और अधिकांश कार्य डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं, तो धर्म के कॉलम में सरना धर्म या अन्य समान धार्मिक पहचान को अलग कोड देकर आंकड़ों के बेहतर और सटीक संकलन को सुनिश्चित किया जा सकता है। सीएम हेमंत सोरेन इस मांग को मंगवाने के लिए दिल्ली रवाना हो गये हैं।
