Ramgarh
रामगढ़ में आदिवासी संघर्ष मोर्चा द्वारा आदिवासियों को वनवासी और सनातनी कहने तथा विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ विरोध मार्च निकाला गया। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
आदिवासी संघर्ष मोर्चा के झारखंड अध्यक्ष जगरनाथ उरांव, राष्ट्रीय संयोजक देवकीनंदन बेदिया, रामगढ़ जिला अध्यक्ष लालचंद बेदिया, सरयू बेदिया, नागेश्वर मुंडा, रामसिंह मांझी, भुनेश्वर बेदिया, रामबृक्ष बेदिया, लाका बेदिया, नीता बेदिया, कांति देवी, कुलदीप बेदिया, शिवकुमार उरांव, तृतियाल बेदिया, कमल बेदिया, लाल कुमार बेदिया सहित सैकड़ों आदिवासी रामगढ़ मेन रोड पर झंडा-बैनर लेकर मार्च में शामिल हुए।

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, “आदिवासियों को वनवासी और सनातनी कहने वाले अमित शाह मुर्दाबाद” तथा “आदिवासियों की डिलिस्टिंग की मांग करने वाले अमित शाह मुर्दाबाद।”
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी आदिकाल से अस्तित्व में हैं, उन्हें वनवासी कहना उचित नहीं है। उनका कहना था कि आदिवासी प्रकृति पूजक हैं और उनकी अपनी स्वतंत्र धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक परंपराएं एवं रीति-रिवाज हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूलवासी हैं और उनकी अलग पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता है।
मार्च में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आरएसएस ने आदिवासियों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से दूर रखा। उन्होंने कहा कि पहले आदिवासियों को मैदानी इलाकों से जंगलों की ओर जाने के लिए मजबूर किया गया और अब जल, जंगल और जमीन में मौजूद खनिज संपदा के दोहन के लिए उन्हें उनके पारंपरिक क्षेत्रों से विस्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी इतिहास, संस्कृति और पहचान को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता आया है और वर्तमान में भी भाजपा तथा आरएसएस की नीतियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हुए है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धर्म कोड की मांग, जल-जंगल-जमीन की रक्षा, स्वायत्तता और पहचान की लड़ाई आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि जब तक आदिवासियों को पूर्ण सामाजिक न्याय और अधिकार नहीं मिलते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
