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बिहार विधानसभा चुनाव को दो महीने से ज़्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन कांग्रेस अब तक अपना विधायक दल नेता तय नहीं कर पाई है।
पार्टी के भीतर इसे महज़ देरी नहीं, बल्कि अंदरूनी खींचतान का नतीजा माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व इस वक्त मनोहर सिंह और अभिषेक कुमार, इन दो नामों पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। पुरानी सारी नाराज़गियों और सवालों का जवाब लेने के साथ-साथ विधायक दल के नेता के चुनाव को लेकर ही सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया गया है।
लेकिन असली परेशानी यहीं से शुरू होती है। पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता को लेकर नेतृत्व पहले से ही असहज नजर आ रहा है।
पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस के भीतर कई ऐसे मौके आए, जब विधायक खुलकर पार्टी लाइन से हटते दिखाई दिए।
अब ज़रा विस्तार से समझते हैं कि आखिर बिहार कांग्रेस में चल क्या रहा है।
मनरेगा बैठक (8 जनवरी 2026)
8 जनवरी 2026 को पटना स्थित सदाकत आश्रम, यानी कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में VB-GRAM-G (मनरेगा नाम परिवर्तन) बिल को लेकर प्रदेश कांग्रेस की अहम बैठक हुई। इसमें पार्टी के सभी छह विधायकों को बुलाया गया था, लेकिन करीब आधे—यानी तीन विधायक—बैठक में शामिल नहीं हो सके।
इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने सफाई दी कि जो विधायक मौजूद नहीं थे, वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्यों में व्यस्त थे और अभियान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सभी विधायक पार्टी के साथ हैं।
दही-चूड़ा समारोह (12 जनवरी 2026)
मकर संक्रांति के मौके पर 12 जनवरी 2026 को सदाकत आश्रम में पारंपरिक ‘दही-चूड़ा’ भोज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के सभी छह विधायक—मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, अबीदुर रहमान, कमरूल होदा और मनोज बिस्वान—नदारद रहे।
भाजपा ने इसे कांग्रेस में दरार का संकेत बताया, हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि मकर संक्रांति भाईचारे का पर्व है और सभी विधायक पार्टी के साथ हैं। पार्टी के पूर्व विधायक दल नेता शकील अहमद खान ने भी साफ किया कि इन अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है और कोई विधायक कहीं नहीं जा रहा।
इसके बाद मामला और आगे बढ़ा, और दिल्ली से विधायकों को बुलावा भेजा गया।
दिल्ली में हाईकमान की बैठक (23 जनवरी 2026)
इन घटनाओं के बीच कांग्रेस हाईकमान और राहुल गांधी ने 23 जनवरी 2026 को बिहार के सभी छह विधायकों को दिल्ली तलब किया। इंदिरा भवन में हुई इस अहम बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे।
बैठक का मकसद बिहार संगठन को मजबूत करना और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करना था। पार्टी की ओर से यह भी साफ किया गया कि विधायक दल के नेता का फैसला इसी बैठक के बाद लिया जाएगा। इन कदमों से संकेत मिला कि हाईकमान प्रदेश विधायकों की एकजुटता बनाए रखने को लेकर गंभीर है।
अब यह भी समझना ज़रूरी है कि विधायक दल के नेता के चयन में पार्टी को किन कारणों से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मनोज प्रसाद सिंह को हाईकमान के निर्देशों का पालन करने वाले और अनुशासित विधायक के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनकी सीमित सांगठनिक पकड़ को एक कमजोरी माना जा रहा है। वहीं अभिषेक कुमार युवा हैं और संगठन में उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती है, मगर अनुभव की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर मनोहर सिंह वरिष्ठ विधायक हैं और सांगठनिक अनुभव भी रखते हैं, हालांकि जातीय संतुलन को लेकर पार्टी के भीतर उनके नाम पर मतभेद हैं। इन नामों के अलावा कुछ अन्य विधायकों पर भी चर्चा चल रही है, लेकिन फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व किसी एक नाम पर सहमति नहीं बना पाया है।
अब यह भी समझना ज़रूरी है कि नेता विधायक दल के चयन में अड़चनें कहां आ रही हैं—
- मनोज प्रसाद सिंह : हाईकमान की बात मानने वाले और अनुशासित छवि के विधायक माने जाते हैं, लेकिन सीमित सांगठनिक पकड़ उनकी कमजोरी बताई जाती है।
- अभिषेक कुमार : युवा विधायक हैं, संगठन में पकड़ मजबूत मानी जाती है, लेकिन अनुभव की कमी बड़ा सवाल है।
- मनोहर सिंह : वरिष्ठ विधायक हैं और सांगठनिक अनुभव भी अच्छा है, हालांकि जातीय संतुलन को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद हैं।
- अन्य नाम : कुछ और विधायकों के नामों पर भी चर्चा चल रही है, लेकिन फिलहाल नेतृत्व किसी एक नाम पर सहमति नहीं बना पाया है।
