अब भारत पर 500% अमेरिकी टैरिफ, ट्रंप के फैसले से अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा; बिल से निर्यात-ऊर्जा-डिप्लोमेसी तीनों पर असर


NEW DELHI


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने भारत के सामने गंभीर आर्थिक और कूटनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े ‘Sanctioning Russia Act of 2025’ को ट्रंप की मंजूरी मिलने के बाद भारत उन देशों की सूची में आ गया है, जिन पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। यह फैसला सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा नीति, निर्यात कारोबार और अमेरिका से रिश्तों को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है।

यह विधेयक रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की इजाजत देता है। भारत, जिसने यूक्रेन युद्ध के बाद बड़े पैमाने पर रूसी कच्चा तेल खरीदा है, अब वॉशिंगटन के सीधे निशाने पर है।

भारत को कितना बड़ा झटका लग सकता है
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दर पर रूसी तेल की खरीद बढ़ाई। एक समय ऐसा भी आया जब रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 35–40 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो युद्ध से पहले लगभग नगण्य थी। इससे भारत को महंगाई नियंत्रित रखने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिली, लेकिन अब यही रणनीति भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनती दिख रही है।

अगर अमेरिका इस बिल के तहत भारत पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है, तो इसका सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिका भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और फार्मा, आईटी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और जेम्स-ज्वेलरी जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। इतनी ऊंची टैरिफ दर के बाद भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में लगभग गैर-प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।

पहले ही बढ़ चुका है टैरिफ दबाव
डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही भारत के रूसी तेल आयात को लेकर नाराज रहे हैं। अगस्त में अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल टैरिफ बढ़कर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। अब अगर 500 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो यह भारत पर अब तक का सबसे कठोर व्यापारिक प्रहार होगा।

ऊर्जा सुरक्षा बनाम वैश्विक दबाव
भारत लगातार यह तर्क देता रहा है कि रूसी तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें काबू में रखने के लिए जरूरी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। लेकिन अमेरिका का नया रुख भारत की इस नीति को अंतरराष्ट्रीय विवाद में बदल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत रूसी तेल से पीछे हटता है तो उसे महंगे विकल्पों की ओर जाना पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।

भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ेगा तनाव
यह विधेयक ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के रिश्ते रणनीतिक और रक्षा साझेदारी के स्तर पर मजबूत माने जा रहे थे। लेकिन व्यापार विवाद, इमिग्रेशन पाबंदियां और अब संभावित 500 प्रतिशत टैरिफ जैसे कदम इन संबंधों में गंभीर तनाव पैदा कर सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि अगर यह बिल सीनेट से पारित होकर लागू हुआ, तो भारत को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका के साथ कठिन बातचीत करनी पड़ेगी। यह सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्र विदेश और ऊर्जा नीति की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

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