RANCHI
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (एसपीएमयू) में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में झारखंड की भाषाई विरासत, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने कहा कि काव्य हृदय की भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है, जो लोगों के बीच आत्मीयता और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत बनाता है। उन्होंने पुस्तक के लेखक सुरेंद्र प्रसाद सिंह को इस महत्वपूर्ण कृति के लिए बधाई देते हुए विश्वविद्यालय के सभी भाषा विभागों को विकसित कर स्कूल ऑफ लैंग्वेज के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और हो विभाग के विद्यार्थियों के स्वागत गीत से हुआ। लेखक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपनी पुस्तक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण से जुड़े गीतों के माध्यम से इसकी विशेषताओं से सभी को अवगत कराया।
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के समन्वयक तथा खोरठा विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए विश्वविद्यालय के नौ भाषा विभागों की आवश्यकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने नए परिसर और आधुनिक लैंग्वेज लैब की स्थापना की जरूरत पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक झारखंड की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को प्रभावी ढंग से सामने लाती है।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जिन्दर सिंह मुंडा ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड की संस्कृति हमेशा प्रकृति से जुड़ी रही है और इस रिश्ते को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने पुस्तक को प्रकृति और समाज के संबंधों को समझने वाली महत्वपूर्ण रचना बताया।
कार्यक्रम का संचालन संजय साहू ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुचित रोय ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी, इंदिरा गांधी कला केंद्र के निदेशक डॉ. संजय झा, डॉ. कमल बेस, रांची विश्वविद्यालय की डॉ. कुमारी शशि, डॉ. दिनेश दिनमणी, डॉ. जय किशोर, दिलदार पूर्ति, डॉ. निताई चंद्र महतो, डॉ. सीता कुमारी, डॉ. सुनिता कुमारी, डॉ. दशमी ओड़िया, शांति केरकेट्टा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
