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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे असंतोष की चर्चाओं के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। खबरों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावती रुख अपना लिया है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर खुद को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के साथ जोड़ने की इच्छा जताई है। इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने नया राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
दिल्ली में गरमाई सियासत
नई दिल्ली में पार्टी के भीतर बगावत की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने कथित बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला और उनके लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। राउत ने कहा कि कुछ नेताओं के व्यवहार से यह महसूस होने लगा है कि बेईमानी उनके स्वभाव का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने मीडिया से यह भी कहा कि उनकी बातों को संपादित या सेंसर न किया जाए।
पार्टी नेताओं ने किया बचाव
राउत के बयान के बाद पार्टी के अन्य नेताओं को सफाई देनी पड़ी। प्रेस वार्ता में मौजूद सांसद अनिल देसाई ने कहा कि राउत की टिप्पणी किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं थी। उन्होंने कहा कि लंबे राजनीतिक जीवन और भावनात्मक दबाव के कारण कभी-कभी नेता तीखी भाषा का इस्तेमाल कर बैठते हैं। देसाई ने जोर देकर कहा कि किसी विशेष सांसद को निशाना बनाने का उद्देश्य नहीं था।
विरोधियों को मिला हमला बोलने का मौका
राउत के बयान को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि किसी भी असहमत नेता का इस तरह अपमान करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष रहा होगा, तभी सांसद नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं। वहीं शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी राउत की भाषा की आलोचना करते हुए इसे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल की कमजोर होती स्थिति का संकेत बताया।
आगे क्या होगा?
यदि बागी सांसदों की संख्या और बढ़ती है तथा उन्हें संसदीय स्तर पर अलग पहचान मिलती है, तो यह शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व स्थिति संभालने की कोशिश में जुटा है, जबकि महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
