लड़की के माफीनामे के बाद भाजपा समर्थकों की ट्रोलिंग पर सवाल, सोशल मीडिया पर दोहरे रवैये के आरोप
NEW DELHI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में FIR का सामना कर रही 15 वर्षीय लड़की के माफीनामे के बाद सोशल मीडिया पर बहस का रुख भाजपा और मोदी समर्थकों की ओर मुड़ गया है। कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया कि सरकार और भाजपा की आलोचना करने वालों, खासकर महिलाओं, के खिलाफ वर्षों से अपमानजनक भाषा, ट्रोलिंग और धमकियां दी जाती रही हैं, लेकिन ऐसे मामलों में समान सख्ती नहीं दिखाई जाती। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर ‘दोहरे मापदंड’ की बहस तेज हो गई है।
यह भाषा समाचार शैली के अनुरूप है क्योंकि इसमें “आरोप लगाया”, “सवाल उठे”, “बहस तेज” जैसे शब्द हैं, जो दावों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में FIR का सामना कर रही 15 वर्षीय लड़की का माफी मांगते हुए एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, ऑनलाइन ट्रोलिंग और कथित दोहरे मापदंड को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जिस तरह सरकार और भाजपा के आलोचकों, खासकर महिलाओं, के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल होता है, उस पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।
वीडियो में लड़की ने कहा कि वायरल क्लिप उसने पोस्ट नहीं की थी और वह इस पूरी घटना से बेहद शर्मिंदा है। उसने बताया कि जुलाई में वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के कनॉट प्लेस गई थी, जहां कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहे और उसे भी वही शब्द दोहराने के लिए उकसाया। लड़की ने कहा कि उसने बहकावे में आकर ऐसा किया और अब उसे अपनी गलती का गहरा पछतावा है।
माफी मांगते हुए उसने कहा कि वह किसी की आंखों में आंखें डालकर बात नहीं कर पा रही है। उसने पूरे देश से क्षमा मांगते हुए कहा कि वह केवल 15 साल की है, यह उसकी पहली और आखिरी गलती थी और वह भविष्य में ऐसी भूल कभी नहीं दोहराएगी।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी अपने एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान न केवल उनके खिलाफ बल्कि उनकी दिवंगत मां के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे “गुमराह बच्चों” को माफ कर देना चाहिए और उन्हें सही रास्ता दिखाया जाना चाहिए।
लड़की का माफी वाला वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब सरकार समर्थक कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने उसकी पहचान सार्वजनिक कर दी और उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
घटना के बाद विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्टैंड-अप कॉमेडियनों ने भी ऑनलाइन ट्रोलिंग और अभद्र भाषा के मुद्दे को उठाया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि प्रधानमंत्री और भाजपा की आलोचना करने वालों, विशेषकर महिलाओं, को लंबे समय से अपमानजनक टिप्पणियों, धमकियों और गालियों का सामना करना पड़ता रहा है। कुछ यूजर्स ने भाजपा आईटी सेल और कुछ नेताओं की कथित टिप्पणियों का हवाला देते हुए इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े युवा आंदोलन का समर्थन करने वाली एक भाजपा नेता की बेटी ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया कि उसे भी पिछले कई महीनों से आपत्तिजनक संदेश और धमकियां मिल रही हैं। उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि इंटरनेट पर अपमानजनक भाषा को लेकर चयनात्मक नाराजगी विश्वसनीय नहीं लगती।
उधर, PTI की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस नोएडा में 29 जुलाई को दर्ज जीरो FIR के आधार पर आगे की कार्रवाई करने से पहले पूरे मामले की जांच कर रही है। शुक्रवार को यह FIR दिल्ली स्थानांतरित कर दी गई, क्योंकि कथित घटना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हुई थी। इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार को लेकर मामला दर्ज किया था, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को संबंधित सामग्री हटाने का नोटिस भेजा था और जांच के लिए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सवाल किया कि क्या सरकार के आलोचकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले ट्रोल्स को भी माफ किया जाएगा। वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि एक नाबालिग लड़की को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस मुद्दे को जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की।
