Puri
पुरी में होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाले इस भव्य आयोजन के पीछे सदियों पुरानी शिल्पकला, पारंपरिक इंजीनियरिंग और कारीगरों की मेहनत छिपी होती है। इस बार रथ निर्माण में इस्तेमाल होने वाली विशेष लोहे की कीलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण ‘जंघा कांटा’ और ‘नराजा कांटा’ हैं, जो रथ की मजबूती और संतुलन सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
रथ की रीढ़ मानी जाती है ‘जंघा कांटा’
रथ निर्माण में उपयोग की जाने वाली सबसे बड़ी कील ‘जंघा कांटा’ कहलाती है। करीब साढ़े चार फीट लंबी यह विशाल कील रथ के 12 परतों वाले ‘पोटला परभादी’ हिस्से में लगाई जाती है। इसका मुख्य कार्य रथ के विशाल लकड़ी के ढांचे को मजबूती प्रदान करना और ऊपरी संरचना को सुरक्षित सहारा देना होता है। रथ की ऊंचाई और भार को देखते हुए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
खास ‘थोपी’ कैप बनाती है इसे अनोखा
कारीगरों के अनुसार ‘जंघा कांटा’ 24 मिमी मोटी लोहे की छड़ से तैयार की जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘थोपी’ नामक विशेष कैप है। यह कैप कील को मजबूती से अपनी जगह पर बनाए रखता है और पूरी संरचना को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करता है। पारंपरिक तकनीक से तैयार यह कील आज भी बिना किसी आधुनिक विकल्प के रथ निर्माण का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।
संतुलन बनाए रखने में अहम है ‘नराजा कांटा’
रथ निर्माण में ‘नराजा कांटा’ नाम की एक और विशेष कील का उपयोग किया जाता है। यह भी लगभग साढ़े चार फीट लंबी होती है, लेकिन इसकी मोटाई 12 मिमी होती है। देखने में साधारण लगने वाली यह कील रथ के महत्वपूर्ण हिस्सों ‘ओलाटा सुआ’ और ‘कलश’ को मजबूती से जोड़ने का काम करती है। इसके कारण रथ की संरचना संतुलित रहती है और विभिन्न हिस्सों के बीच मजबूत पकड़ बनी रहती है।
पारंपरिक इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण
कारीगर बताते हैं कि ‘नराजा कांटा’ का उपयोग केवल जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि पूरे ढांचे को स्थिर रखने के लिए भी किया जाता है। हाथ से बनाई जाने वाली ये विशाल कीलें उस पारंपरिक इंजीनियरिंग ज्ञान की मिसाल हैं, जो पीढ़ियों से रथ निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। आधुनिक तकनीक के दौर में भी इन पारंपरिक तरीकों को सुरक्षित रखा गया है।
नंदीघोष रथ में होगा इन विशेष कीलों का उपयोग
रथ निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद इन विशेष रूप से तैयार की गई कीलों का उपयोग भगवान जगन्नाथ के भव्य ‘नंदीघोष’ रथ में किया जाएगा। रथ यात्रा से पहले इन्हें रथ के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों में लगाया जाएगा, ताकि यात्रा के दौरान विशाल संरचना पूरी तरह सुरक्षित और संतुलित बनी रहे। यही कारण है कि ‘जंघा कांटा’ और ‘नराजा कांटा’ को रथ निर्माण की अदृश्य लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ताकत माना जाता है।
