GUAHATI
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विश्वास जताया है कि असम अगले वर्ष तक आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट (AFSPA) से पूरी तरह मुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वर्तमान में यह कानून केवल तिनसुकिया और चराइदेव जिलों में ही लागू है।
लोक सेवा भवन में कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तय समय-सीमा के भीतर असम AFSPA हटाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ सुरक्षा चुनौतियां अभी भी तिनसुकिया क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन स्थिति लगातार बेहतर हो रही है।
मुख्यमंत्री ने पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में AFSPA हटाने की संभावनाओं पर टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन कहा कि असम में शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सुरक्षा एजेंसियों और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों को दिया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय भी साझा किया। उन्होंने बताया कि अब ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारियों की समय से पहले अपने मूल कैडर में वापसी संबंधी मांगों पर केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि राज्य मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से निर्णय लेगा। उनका कहना था कि इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
सरमा ने नौकरशाही में भ्रष्टाचार को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जिससे आम लोगों के बीच प्रशासनिक व्यवस्था की छवि प्रभावित हुई है। सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुधारात्मक कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने असमिया भाषा को लेकर चल रही बहस पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भाषा का अस्तित्व केवल जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करता। उनके अनुसार, भाषा तब तक जीवित रहती है जब तक लोग उसे अपने जीवन और संस्कृति का हिस्सा बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को केवल आंकड़ों के आधार पर बचाए रखने की कोशिश व्यावहारिक नहीं है और समाज को स्वाभाविक रूप से भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
