RANCHI
झारखंड में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने पूर्व मंत्री और अनुसूचित जाति समाज के वरिष्ठ नेता बैजनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। शनिवार को रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में झामुमो के केंद्रीय महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी औपचारिक घोषणा की।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार चयन की जिम्मेदारी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपी गई थी। वरिष्ठ नेताओं से व्यापक विचार-विमर्श और संगठन के भीतर विभिन्न स्तरों पर प्राप्त सुझावों के बाद बैजनाथ राम के नाम पर अंतिम सहमति बनी।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बैजनाथ राम का राजनीतिक अनुभव, संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच उनकी स्वीकार्यता उन्हें राज्यसभा के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत के साथ चुनावी प्रक्रिया में भाग लेंगे।
झामुमो नेताओं ने दावा किया कि विधानसभा में उपलब्ध संख्या बल के आधार पर पार्टी अपने प्रत्याशी को विजयी बनाने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि झामुमो के 34 विधायक पूरी मजबूती के साथ बैजनाथ राम के समर्थन में खड़े हैं और चुनाव में पार्टी को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी।
इस अवसर पर नामांकन कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि बैजनाथ राम आगामी 8 जून को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। नामांकन के दौरान महागठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के भी मौजूद रहने की संभावना है। पार्टी इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रही है।
बैजनाथ राम लंबे समय से झारखंड की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं और विशेष रूप से लातेहार समेत कई क्षेत्रों में अनुसूचित जाति समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके चयन के माध्यम से झामुमो ने सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के साथ-साथ दलित समुदाय को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।
झामुमो का मानना है कि बैजनाथ राम को राज्यसभा भेजे जाने से संसद में झारखंड के वंचित एवं पिछड़े वर्गों की आवाज को और मजबूती मिलेगी। साथ ही यह निर्णय पार्टी के सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति के एजेंडे को भी मजबूत करने वाला कदम साबित हो सकता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और विभिन्न दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं।
