झारखंड और आदिवासी संदर्भ में क्या है ‘पराचेरी’ विवाद: तमिलनाडु में जाति की पहचान की लड़ाई तेज

CENTRAL DESK

तमिलनाडु में कार्रवाई, झारखंड में भी समान सवाल

Tamil Nadu Adi Dravidar and Tribal Welfare Commission ने विरुधुनगर जिले में “पराचेरी” जैसे जाति-आधारित नाम के उपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन से जवाब तलब किया है। यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड में ऐसे नाम सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।

इस घटनाक्रम को झारखंड के आदिवासी इलाकों से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जहां कई स्थानों के नाम, टोले या बस्तियां अब भी सामाजिक पहचान से जुड़ी शब्दावली में दर्ज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले संदर्भ अलग हों, लेकिन “पहचान बनाम गरिमा” का मुद्दा दोनों राज्यों में समान रूप से मौजूद है।


सरकारी आदेश के उल्लंघन पर आयोग सख्त

आयोग के अध्यक्ष V Annamalai ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर पूछा है कि श्रीविल्लिपुथुर क्षेत्र के वडक्कु अचमथविल्थान गांव में अब भी “पराचेरी” नाम क्यों दर्ज है।

आयोग ने 6 अक्टूबर 2025 के उस सरकारी आदेश का हवाला दिया, जिसमें Government of Tamil Nadu ने सभी विभागों को जाति-आधारित नाम हटाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद यह नाम वोटर लिस्ट और अन्य रिकॉर्ड में बना हुआ है।


चुनाव बहिष्कार से लेकर सम्मान की मांग तक

गांव के दलित समुदाय ने इस मुद्दे पर 2026 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया था। उनका कहना है कि “पराचेरी” शब्द उनकी सामाजिक पहचान को सीमित करता है और अपमान का कारण बनता है।

हालांकि मतदान के दिन अधिकांश लोगों ने वोट डाला, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष सम्मानजनक पहचान के लिए जारी रहेगा।


झारखंड में आदिवासी पहचान बनाम नामकरण की बहस

झारखंड के कई आदिवासी क्षेत्रों—जैसे सिमडेगा, खूंटी और दुमका—में भी बस्तियों और टोलों के नाम पारंपरिक, जातीय या समुदाय आधारित पहचान से जुड़े हैं।

हाल के वर्षों में कुछ आदिवासी संगठनों ने मांग उठाई है कि सरकारी दस्तावेजों में ऐसे नामों की समीक्षा हो, ताकि पहचान सम्मानजनक और समावेशी हो। हालांकि झारखंड में यह मुद्दा तमिलनाडु जितना औपचारिक विवाद नहीं बना, लेकिन जमीन स्तर पर यह बहस लगातार मौजूद है।


एक सप्ताह में मांगा जवाब, कार्रवाई के संकेत

आयोग ने जिला प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है:

  • सरकारी आदेश के बावजूद नाम क्यों नहीं बदला गया
  • अब तक क्या कार्रवाई हुई
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कदम उठाए गए

सरकारी आदेश के उल्लंघन पर आयोग सख्त

आयोग के अध्यक्ष V Annamalai ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर पूछा है कि श्रीविल्लिपुथुर क्षेत्र के वडक्कु अचमथविल्थान गांव में अब भी “पराचेरी” नाम क्यों दर्ज है।

आयोग ने 6 अक्टूबर 2025 के उस सरकारी आदेश का हवाला दिया, जिसमें Government of Tamil Nadu ने सभी विभागों को जाति-आधारित नाम हटाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद यह नाम वोटर लिस्ट और अन्य रिकॉर्ड में बना हुआ है।


चुनाव बहिष्कार से लेकर सम्मान की मांग तक

गांव के दलित समुदाय ने इस मुद्दे पर 2026 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया था। उनका कहना है कि “पराचेरी” शब्द उनकी सामाजिक पहचान को सीमित करता है और अपमान का कारण बनता है।

हालांकि मतदान के दिन अधिकांश लोगों ने वोट डाला, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष सम्मानजनक पहचान के लिए जारी रहेगा।


झारखंड में आदिवासी पहचान बनाम नामकरण की बहस

झारखंड के कई आदिवासी क्षेत्रों—जैसे सिमडेगा, खूंटी और दुमका—में भी बस्तियों और टोलों के नाम पारंपरिक, जातीय या समुदाय आधारित पहचान से जुड़े हैं।

हाल के वर्षों में कुछ आदिवासी संगठनों ने मांग उठाई है कि सरकारी दस्तावेजों में ऐसे नामों की समीक्षा हो, ताकि पहचान सम्मानजनक और समावेशी हो। हालांकि झारखंड में यह मुद्दा तमिलनाडु जितना औपचारिक विवाद नहीं बना, लेकिन जमीन स्तर पर यह बहस लगातार मौजूद है।


एक सप्ताह में मांगा जवाब, कार्रवाई के संकेत

आयोग ने जिला प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है:

  • सरकारी आदेश के बावजूद नाम क्यों नहीं बदला गया
  • अब तक क्या कार्रवाई हुई
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कदम उठाए गए

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