DHANBAD
झारखंड राज्य दिव्यांगता सलाहकार बोर्ड के गठन को नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई है। यह स्थिति तब है जब नियमों के अनुसार बोर्ड की बैठक हर महीने कम से कम एक बार होना अनिवार्य है। ऐसे में दिव्यांगजनों के विकास, पुनर्वास, संरक्षण और उन्हें मुख्यधारा में लाने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे अधर में लटके हुए हैं।
6 जून 2025 को बोर्ड का गठन बड़े उद्देश्य के साथ किया गया था, ताकि राज्य में दिव्यांगजनों के अधिकारों और सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके। लेकिन बैठक नहीं होने के कारण न तो किसी नीति पर चर्चा हो पाई है और न ही किसी ठोस योजना को लागू करने की दिशा में पहल हो सकी है।
इस मुद्दे को लेकर धनबाद निवासी और बोर्ड के सदस्य मो. हारून रशीद ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य निःशक्तता आयुक्त से बातचीत करने के साथ-साथ लिखित रूप में भी अपनी बात रखी, लेकिन इसके बावजूद बैठक आयोजित करने को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
हारून रशीद का कहना है कि यदि बोर्ड की बैठकें ही नहीं होंगी, तो दिव्यांगजनों के विकास, पुनर्वास और उनके अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक कैसे पहुंचेगा, जब नीति निर्माण और समीक्षा की प्रक्रिया ही ठप पड़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दे लगातार नजरअंदाज होते रहेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर कब संज्ञान लेता है और बोर्ड की बैठक शुरू कराकर लंबित कार्यों को आगे बढ़ाता है।
