चीन से आ रहे ईरानी जहाज़ पर अमेरिकी कब्ज़े से बढ़ा तनाव, सीज़फ़ायर पर खतरा, IRGC बोला बदला लेंगे

CENTRAL DESK

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक ईरानी मालवाहक जहाज़ पर अमेरिकी कब्ज़े के बाद दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत की सभी राहें लगभग बंद हो गई हैं। ईरानी सेना IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने इस कार्रवाई को ‘हथियारबंद समुद्री डकैती’ करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में सीज़फ़ायर के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घंटों के गतिरोध के बाद अमेरिकी कार्रवाई

मिली जानकारी के अनुसार, कई घंटों तक चले तनावपूर्ण गतिरोध के बाद अमेरिकी मरीन ने हेलीकॉप्टर की मदद से जहाज़ पर उतरकर उसे अपने कब्ज़े में ले लिया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज़ उनकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस कार्रवाई के दौरान जहाज़ के इंजन को निष्क्रिय कर दिया गया, जिसके बाद ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जहाज़ अब पूरी तरह अमेरिकी नियंत्रण में है और उसकी जांच की जा रही है।

ईरान का कड़ा रुख, वार्ता से पीछे हटने का ऐलान

इस घटना के बाद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब किसी भी नई शांति वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। तेहरान ने अमेरिका की नीतियों को आक्रामक बताते हुए कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई का जल्द ही जवाब दिया जाएगा। वहीं, उपराष्ट्रपति मोहम्मदरेज़ा आरिफ ने कहा कि अगर ईरान के तेल निर्यात को रोका गया तो वैश्विक स्तर पर भी इसके गंभीर परिणाम होंगे।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य और वैश्विक असर

घटना का सबसे बड़ा असर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर देखने को मिल रहा है, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है। पहले जहां ईरान ने इस मार्ग पर अपनी नाकेबंदी हटाई थी, वहीं अब उसने फिर से नियंत्रण कड़ा कर दिया है।
इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है, तेल की कीमतों में 5% से अधिक उछाल देखा गया है, जबकि शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

बढ़ती धमकियां और अनिश्चित भविष्य

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अमेरिकी पक्ष की ओर से कड़ी चेतावनियां दी जा रही हैं। पहले ही यह संकेत दिया गया था कि अगर ईरान ने अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं, तो उसके अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में यह ताज़ा घटना न केवल क्षेत्रीय शांति प्रयासों को झटका देती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक बड़े टकराव की आशंका भी बढ़ा रही है।

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