NEW DELHI
शनिवार को महाराष्ट्र के नागपुर में उस समय भारी विवाद खड़ा हो गया जब NEET-UG पुनर्परीक्षा के एक उम्मीदवार को अबू धाबी (Abu Dhabi) में परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया। यह मामला देखते ही देखते राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में बदल गया और परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे।
नागपुर के छात्र अब्दुल्ला तालिब ने जब अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसमें महाराष्ट्र के नागपुर, वर्धा या भंडारा जैसे विकल्पों के बजाय विदेश में अबू धाबी परीक्षा केंद्र दर्ज था। परिवार के अनुसार छात्र न तो पासपोर्ट रखता है और न ही इतनी कम समय सीमा में विदेश जाकर परीक्षा देने की कोई व्यवस्था संभव थी।
इस घटना पर विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो व्यवस्था एक छात्र को उसके शहर में परीक्षा केंद्र नहीं दे सकती, उसे परीक्षा कराने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
Arvind Kejriwal ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए इसे “दुनिया की सबसे नाकाबिल सरकार” करार दिया और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
इसी बीच National Testing Agency (NTA) ने बयान जारी कर कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामले को ठीक कर लिया गया है और उम्मीदवार को अब नागपुर में ही परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और तृणमूल कांग्रेस ने भी इस घटना को लेकर सरकार और परीक्षा एजेंसियों की कड़ी आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि लगातार हो रही ऐसी गलतियाँ देश की राष्ट्रीय परीक्षाओं की गंभीर अव्यवस्था को उजागर करती हैं।
अधिकारियों के अनुसार NEET-UG पुनर्परीक्षा 21 जून को देश के 551 शहरों और 14 विदेशी शहरों में आयोजित की जाएगी, जिसमें लाखों छात्र शामिल होंगे। यह पुनर्परीक्षा पहले पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द हुई परीक्षा के बाद कराई जा रही है, जिसकी जांच CBI को सौंपी गई है।
