Ranchi
JSLPS की ओर से आयोजित ग्रामीण महिलाओं की राउंड टेबल मीटिंग में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं को जमीन और संसाधनों में बराबरी का हिस्सा दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए लगातार शांत लेकिन प्रभावी तरीके से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल आजीविका तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें प्रतिस्पर्धी दौर में मजबूती से खड़ा करना है।
कार्यक्रम में प्रख्यात शिक्षाविद् एवं लैंगिक समानता विशेषज्ञ डॉ पाम राजपूत, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक लुईस मरांडी, विधायक श्वेता सिंह, पद्मश्री चामी मुर्मू, पद्मश्री छूटनी महतो, रमा खलखो और दयामनी बारला ने भी अपने विचार रखे।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य में स्वयं सहायता समूह (SHG) के तहत 32 लाख महिलाएं जुड़कर न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज के भविष्य को संवार रही हैं। JSLPS की पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में शिक्षित महिलाओं की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में अभी बहुत काम बाकी है, जिस दिशा में सरकार सक्रिय है।
उन्होंने बताया कि क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से समूह से जुड़ी महिलाएं स्वरोजगार में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। बाजार में उनके उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है और वे अब ब्रांड के रूप में स्थापित हो रहे हैं। बिरसा हरित ग्राम योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गांव की महिलाओं ने पौने तीन करोड़ पेड़ लगाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड की महिलाएं किसी से कम नहीं हैं और यह उन्होंने अपने कार्यों से साबित कर दिया है। साथ ही राज्य में प्रभावी महिला नीति बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसका स्पष्ट परिणाम दिखे।
पेसा नियमावली का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि इसमें महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित किया गया है। ग्राम सभा में सहायक सचिव के पद पर महिलाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है और इसका लाभ मिलना भी शुरू हो गया है।
ग्रामीण महिलाओं में स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता मौजूद – सुप्रिया श्रीनेत
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि देश की आधी आबादी आज अपने अधिकार और आरक्षण के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे समय में इस तरह की पहल बेहद प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को समझने के लिए शहर और गांव की महिलाओं को देखने का नजरिया बदलना होगा। दोनों के जीवन और परिस्थितियों में अंतर है, लेकिन ग्रामीण महिलाओं में स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता होती है। जरूरत है उसे पहचानने और आगे बढ़ाने की, जिसमें सरकार के साथ समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

अकेली महिला पर सवाल उठना आज भी चिंताजनक – डॉ पाम राजपूत
डॉ पाम राजपूत ने कहा कि आज भी समाज में अकेली महिला को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, जो चिंताजनक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक महिला अपने आप में सक्षम नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि झारखंड में महिला नीति का अभाव इस दिशा में गंभीर सोच की मांग करता है। सरकार और समाज को मिलकर ऐसी नीति तैयार करनी चाहिए, जो जमीनी स्तर पर असरदार साबित हो। पंचायत स्तर तक इस विषय पर संवाद जरूरी है और ग्रामीण महिलाओं को केंद्र में रखकर नीति बनाई जानी चाहिए।
अनुभवों से प्रेरणा: छूटनी महतो और चामी मुर्मू
पद्मश्री छूटनी महतो ने डायन-बिसाही के खिलाफ अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 1500 से अधिक महिलाओं को न्याय दिलाने में मदद की है। उन्होंने इस कुप्रथा को मानसिक बीमारी और साजिश का परिणाम बताया। वहीं पद्मश्री चामी मुर्मू ने पर्यावरण संरक्षण को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि उनकी छोटी पहल समय के साथ एक बड़े आंदोलन में बदल गई।
जनप्रतिनिधियों ने भी रखा जोरदार पक्ष
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक लुईस मरांडी और विधायक श्वेता सिंह ने भी ग्रामीण महिलाओं की क्षमता को उनकी सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के स्वावलंबन और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंच रहा है।
इस राउंड टेबल मीटिंग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पत्रकारिता, पंचायत, सामाजिक संगठन, उद्यमिता और SHG से जुड़ी महिलाओं ने अपने सुझाव साझा किए। कार्यक्रम में पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी सहित कई विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपने विचार रखे।

