22 करोड़ की ठगी मामले में बड़ा फैसला
Mumbai
डिजिटल अरेस्ट के जरिए 78 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग से करीब 22.92 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में रिजर्व बैंक ने बड़ा कदम उठाया है। RBI के लोकपाल ने पांच बैंकों को निर्देश दिया है कि वे पीड़ित को मुआवजे के तौर पर कुल 1.31 करोड़ रुपये का भुगतान करें। यह आदेश 25 फरवरी को जारी किया गया था और इसे देश के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट मामलों में एक अहम कार्रवाई माना जा रहा है।
किन बैंकों पर गिरी गाज
इस मामले में जिन बैंकों को जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, ICICI बैंक, इंडसइंड बैंक और यस बैंक शामिल हैं। RBI ने निर्देश दिया है कि ये बैंक पीड़ित को ट्रांसफर की गई रकम का 5% से 7.5% तक मुआवजा दें। इनमें से यस बैंक को 7.5% भुगतान करने को कहा गया है, जबकि बाकी चार बैंकों को 5% हिस्सा चुकाना होगा।
KYC नियमों में लापरवाही बनी वजह
RBI के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इन बैंकों ने KYC और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया। खासकर मनी म्यूल खातों की निगरानी और संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखने में गंभीर कमियां पाई गईं। इसी वजह से अवैध खातों के जरिए इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर हो सकी।
पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट और RBI में लगाई गुहार
पीड़ित नरेश मल्होत्रा, जो खुद एक रिटायर्ड बैंकर हैं, ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें 1.31 करोड़ रुपये की राशि पहले ही मिल चुकी है, लेकिन उन्होंने RBI से ब्याज और हर्जाने सहित पूरी रकम लौटाने की मांग की है।
CBI जांच और बैंकों की भूमिका पर सवाल
इस मामले को मार्च 2026 के अंत में CBI को सौंप दिया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ित ने खुद बैंक शाखाओं में जाकर लेन-देन किए थे, इसलिए प्रेषक बैंकों की सीधी लापरवाही नहीं मानी गई। हालांकि, लाभार्थी बैंकों द्वारा संदिग्ध खातों की निगरानी में कमी को गंभीर मानते हुए यह जुर्माना लगाया गया।
यह मामला देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और बैंकिंग सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले नए डिजिटल अपराधों को लेकर।
