ओडिशा की आदिवासी डिश को राष्ट्रीय पहचान की पहल, पारंपरिक रेस्टोरेंट को मिलेगा इंटेंसिव; ये हैं शर्तें

Bhubaneswar

ओडिशा सरकार ने राज्य की समृद्ध पारंपरिक और आदिवासी खाद्य संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाने के उद्देश्य से ‘ओडिशा टूरिज्म (संशोधन) पॉलिसी, 2026’ के तहत विशेष प्रोत्साहन योजना यानी इंटेंसिव लागू की है। सरकार ने ऐसे रेस्टोरेंट्स के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो पारंपरिक ओडिया व्यंजनों के साथ-साथ राज्य की आदिवासी पाक परंपराओं को बढ़ावा देना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा के पारंपरिक भोजन की जड़ें राज्य के आदिवासी समाजों में गहराई से जुड़ी हैं, जहां जंगलों, कंद-मूल, बाजरा, स्थानीय चावल, महुआ, साग और प्राकृतिक सामग्री से तैयार अनेक व्यंजन आज भी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।

ओडिशा देश के उन राज्यों में शामिल है जहां संथाल, मुंडा, हो, भूमिज, जुआंग, डोंगरिया कोंध, कुटिया कोंध और बोंडा जैसी अनेक जनजातियां सदियों से अपनी विशिष्ट खाद्य परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन व्यंजनों को पर्यटन से जोड़कर न केवल स्थानीय संस्कृति को संरक्षण मिलेगा, बल्कि आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसी सोच के तहत सरकार पारंपरिक ओडिया भोजन परोसने वाले प्रतिष्ठानों को आर्थिक सहायता देने जा रही है।

नई गाइडलाइंस के अनुसार, प्रोत्साहन प्राप्त करने के इच्छुक रेस्टोरेंट्स के पास भूमि का स्पष्ट स्वामित्व अथवा वैध लीज़ होना आवश्यक है। कम से कम 25 लोगों के बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ एवं पूर्णतः कार्यशील रसोई, सार्वजनिक शौचालय तथा पर्याप्त पार्किंग जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी। इसके अलावा भूमि और भवन की लागत को छोड़कर न्यूनतम 20 लाख रुपये का निवेश करना होगा। रेस्टोरेंट में पारंपरिक ओडिया भोजन और उससे जुड़े स्थानीय व्यंजनों की जानकारी रखने वाले प्रशिक्षित रसोइयों और कर्मचारियों की नियुक्ति भी जरूरी होगी।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मेन्यू कार्ड पर ओडिया व्यंजनों के नाम ओडिया और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रदर्शित किए जाएं, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक स्थानीय भोजन और उसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझ सकें। इससे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।

योजना के तहत पात्र रेस्टोरेंट्स को CAPEX और OPEX दोनों प्रकार की सहायता मिलेगी। CAPEX सहायता के अंतर्गत योग्य परियोजना लागत का 30 प्रतिशत तक, अधिकतम 5 करोड़ रुपये का रिइम्बर्समेंट प्रदान किया जाएगा। यह राशि संचालन शुरू होने के बाद तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से जारी होगी। रेस्टोरेंट के इंटीरियर, फर्निशिंग, रसोई उपकरण, नवीनीकरण तथा अन्य आवश्यक निर्माण कार्य इस सहायता के दायरे में आएंगे।

वहीं OPEX सहायता के तहत बिजली बिल और राज्य GST से जुड़े खर्चों में राहत दी जाएगी। ओडिशा में संचालित रेस्टोरेंट्स को शुरुआती वर्षों में बिजली शुल्क पर विशेष रिइम्बर्समेंट मिलेगा, जबकि राज्य के बाहर स्थापित चयनित रेस्टोरेंट्स को भी तीन वर्षों तक बिजली व्यय पर सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति यूनिट अधिकतम लाभ दो लाख रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है।

यह योजना ओडिशा के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ देश के कई बड़े शहरों तक विस्तारित की गई है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में सीमित संख्या में रेस्टोरेंट्स को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा आगरा, वाराणसी, गोवा, कोच्चि और जयपुर जैसे पर्यटन केंद्रों को भी इसमें शामिल किया गया है।

पर्यटन और संस्कृति से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह पहल केवल ओडिया भोजन को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ओडिशा की आदिवासी खाद्य विरासत, मिलेट आधारित पारंपरिक खानपान और स्थानीय कृषि उत्पादों को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। इससे आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

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