आंबेडकर जयंती पर साहित्यिक गोष्ठी, जलेस ने आशा भोंसले और प्रवीण परिमल को दी श्रद्धांजलि



RANCHI

साहित्यिक गोष्ठी में संवैधानिक जिम्मेदारियों पर चर्चा

जनवादी लेखक संघ रांची द्वारा आंबेडकर जयंती और राहुल सांकृत्यायन की पुण्यतिथि के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम सह गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वकर्मा लेन स्थित सफदर हाशमी सभागार में कुमार बृजेंद्र की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें शहर के बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 1 बजे हुई और “हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी व सांस्कृतिक परंपरा” विषय पर गहन परिचर्चा की गई। संचालन अपराजिता मिश्रा और डॉ. आलम आरा ने संयुक्त रूप से किया।

महान हस्तियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

इस अवसर पर प्रसिद्ध पार्श्वगायिका आशा भोंसले के निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े गीतकार एवं ग़ज़लगो प्रवीण परिमल को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके अलावा जलेस रांची के सक्रिय सदस्य सुधीर पाल और डॉ. आलम आरा को लखनऊ में आयोजित केंद्रीय परिषद की बैठक में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की गई, जिससे रांची का प्रतिनिधित्व बढ़कर पांच हो गया।

वक्ताओं ने रखे विचार, युवाओं को किया प्रेरित

गोष्ठी में डॉ. विनोद कुमार, डॉ. किरण, डॉ. जमशेद कमर, वीना श्रीवास्तव, सुधीर पाल और निगार सुल्ताना सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने भीमराव आंबेडकर के विचारों को जीवन में अपनाने और संविधान के मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया। साथ ही बोलगा से गंगा तक जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए साहित्यिक विरासत को समझने की आवश्यकता बताई गई। वक्ताओं ने सामाजिक समानता, महिला अधिकार और नागरिक जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की। अध्यक्षीय संबोधन में कुमार बृजेंद्र ने कहा कि वर्तमान समय में बाबा साहेब और राहुल सांकृत्यायन के विचारों को पढ़ना और आत्मसात करना बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में मुईजुद्दीन मिर्दाहा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया और ऐसे आयोजनों को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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