परिसीमन और 33% महिला आरक्षण का रास्ता साफ, लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ने की तैयारी


केंद्र सरकार के तीन विधेयक से बड़े संवैधानिक बदलाव की ओर कदम



New Delhi 

परिसीमन और आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज

केंद्र सरकार ने तीन अहम विधेयकों का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है, जिससे नवीनतम जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation) का रास्ता साफ हो गया है। इन प्रस्तावों के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 545 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है। साथ ही संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार ने संभावित संवैधानिक संशोधन से पहले इन विधेयकों का ड्राफ्ट सांसदों के साथ साझा किया है। माना जा रहा है कि संसद के विशेष सत्र में इन पर विस्तार से चर्चा कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सीटों के नए बंटवारे से बदलेगा राजनीतिक समीकरण

प्रस्ताव के अनुसार 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेंगी, जिससे कुल सीटों की संख्या 850 तक पहुंच सकती है। सीटों में यह बढ़ोतरी नए सिरे से परिसीमन के जरिए की जाएगी, जिससे आरक्षण को लागू करना आसान हो सके।

संभावना जताई जा रही है कि ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो सकते हैं, जिससे देश की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल, रणनीति बनाने में जुटा

इस प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों ने चिंता जताई है। आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और द्रविड़ मुनेत्र कषगम जैसी पार्टियों का कहना है कि परिसीमन 2011 की बजाय नई जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, INDIA गठबंधन की कई पार्टियां महिलाओं के आरक्षण में पिछड़े वर्गों के लिए “आरक्षण के अंदर आरक्षण” की मांग भी उठा सकती हैं। इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं की बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रस्तावित है, जिसमें कई प्रमुख दलों के शामिल होने की संभावना है।

संवैधानिक संशोधन पर सरकार की राह आसान नहीं

विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रस्तावित बदलावों में परिसीमन पर अधिक जोर है। डेरेक ओ ब्रायन ने बिल की पारदर्शिता और समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

संवैधानिक संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, ऐसे में सरकार को विपक्ष का समर्थन हासिल करना होगा। यही वजह है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी खींचतान और तेज होने की संभावना है।

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