RANCHI
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न परीक्षाओं में आयु सीमा और कट-ऑफ तिथि को चुनौती देने वाले अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर सभी अपीलों और याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि आयु सीमा तय करना राज्य सरकार और नियोक्ता का नीतिगत अधिकार है, जिसमें अदालत का हस्तक्षेप सीमित दायरे में ही संभव है।
मिली जानकारी के अनुसार, जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक कोई निर्णय मनमाना, भेदभावपूर्ण या संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ न हो, तब तक न्यायालय नीतिगत मामलों में दखल नहीं दे सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आयु सीमा में छूट देना कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि सरकार द्वारा दी जाने वाली एक रियायत की तरह है।
दरअसल, झारखंड संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा, विज्ञापन संख्या 05/2026 के लिए निर्धारित एक अगस्त 2022 की कट-ऑफ तिथि को लेकर अमित कुमार और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लंबे समय तक नियमित परीक्षाएं नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थी ओवरएज हो गए और परीक्षा देने से वंचित रह गए। उन्होंने मांग की थी कि कट-ऑफ तिथि को बदलकर एक अगस्त 2017 या 2018 किया जाए, ताकि अधिक उम्मीदवारों को मौका मिल सके।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित विज्ञापन झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा नियमावली, 2021 के अनुरूप जारी किया गया है और उसमें आयु सीमा में अतिरिक्त छूट का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार ने यह भी दलील दी कि बार-बार आयु सीमा में व्यापक छूट देने से भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता और प्रशासनिक कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि थोक में रिलैक्सेशन देना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली परीक्षाओं में छूट दी गई थी, इसलिए हर बार वैसी ही राहत मिले, यह जरूरी नहीं है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब JPSC अभ्यर्थियों की कट-ऑफ तिथि बदलने की मांग पर फिलहाल रोक लग गई है। वहीं, इस निर्णय को राज्य की भर्ती प्रक्रिया और भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
