Ranchi
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने NEET परीक्षा के आयोजन में भारतीय वायुसेना की सहायता लिए जाने और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सेना का उपयोग केवल देश की रक्षा, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी गंभीर जिम्मेदारियों के लिए होना चाहिए, न कि परीक्षा के प्रश्नपत्र ढोने जैसे कार्यों के लिए।
सेना के इस्तेमाल पर सरकार की आलोचना
सुप्रियो भट्टाचार्य ने भारतीय वायुसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सेना ने हमेशा देशहित में अपना कर्तव्य निभाया है, लेकिन परीक्षा सामग्री के परिवहन में उसका उपयोग करना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। उन्होंने इसे सरकार की “शर्मनाक स्थिति” करार दिया और कहा कि इससे संस्थागत व्यवस्था की कमजोरियां उजागर होती हैं।
उन्होंने कहा, “भारतीय रक्षा मंत्रालय को धन्यवाद देता हूं, लेकिन मानव संसाधन मंत्रालय को धिक्कार है।” उनके अनुसार, यह स्थिति सरकार की नाकामी को छिपाने की कोशिश का परिणाम है, जिसमें सेना की प्रतिष्ठा को भी अनावश्यक रूप से दांव पर लगा दिया गया।
शिक्षा मंत्रालय और NTA पर गंभीर आरोप
भट्टाचार्य ने शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि NTA एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा कराने में सक्षम नहीं है, तो यह पूरे शासन तंत्र की विफलता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक असफलताओं को छिपाने के लिए असाधारण उपाय अपना रही है, जिससे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है।
छात्रों की आत्महत्या पर चिंता और इस्तीफे की मांग
JMM नेता ने दावा किया कि मई से जुलाई के बीच NEET से जुड़े 17 छात्रों ने आत्महत्या की है, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे “खिलवाड़” का परिणाम है।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े विवाद और कथित अनियमितताओं के बाद भी उनका पद पर बने रहना नैतिक रूप से गलत है। भट्टाचार्य ने इस पूरे मामले को एक “गहरी साजिश” बताते हुए कहा कि देश की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और छात्रों व आम जनता की आस्था पर लगातार प्रहार हो रहा है।
