10 साल बाद भी नहीं बदली 1000 रुपये की पेंशन, EPS-95 पेंशनर्स ने सरकार को दी देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
NEW DELHI
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे EPS-95 पेंशनभोगियों ने बारिश और उमस के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया। बुजुर्ग पेंशनर्स का आरोप है कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने का वादा किया था, लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसी नाराजगी के बीच EPS-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी (NAC) ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द फैसला नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संगठन ने मांग की है कि न्यूनतम मासिक पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये किया जाए। इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA), मुफ्त चिकित्सा सुविधा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ भी दिए जाएं। संगठन का कहना है कि देश में करीब 81 लाख EPS-95 पेंशनभोगी बेहद कम पेंशन पर जीवन बिताने को मजबूर हैं।
EPFO कार्यालयों के घेराव और ‘जेल भरो‘ आंदोलन की चेतावनी
EPS-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो पूरे देश में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के कार्यालयों के बाहर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद “जेल भरो आंदोलन” शुरू किया जाएगा। आंदोलन के कुछ नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और संसद के सामने आत्मदाह जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।
’12 साल से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है‘
NAC की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष तपन दत्ता ने कहा कि पिछले दस वर्षों से संसद सत्र के दौरान लगातार जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई श्रम मंत्रियों से मुलाकात हुई, हर बार मांगों को उचित बताया गया और जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
उनका कहना है कि 2014 में भाजपा ने खुद न्यूनतम पेंशन 3,000 रुपये करने की मांग उठाई थी और तत्कालीन सरकार के 1,000 रुपये के प्रस्ताव को अपर्याप्त बताया था। इसी भरोसे पर लाखों पेंशनर्स ने बदलाव की उम्मीद की थी, लेकिन सितंबर 2014 में पेंशन 1,000 रुपये तय होने के बाद आज तक उसमें कोई संशोधन नहीं हुआ।
आज भी 500-700 रुपये पेंशन पाने को मजबूर हजारों बुजुर्ग
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन लाखों पेंशनर्स आज भी 500 से 700 रुपये मासिक पेंशन पर गुजर-बसर कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी राशि में दवा, भोजन और दैनिक जरूरतें पूरी करना असंभव है।
तपन दत्ता ने कहा कि पेंशनभोगी कोई दान या खैरात नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने 30 से 40 वर्षों तक नौकरी की, नियमित अंशदान दिया और अब सम्मानजनक जीवन की अपेक्षा कर रहे हैं। कई बुजुर्गों को आज भी जीविका चलाने के लिए रिक्शा चलाने या छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं।
सरकारी ही नहीं, निजी और असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारी भी हैं शामिल
NAC का कहना है कि EPS-95 योजना केवल सरकारी उपक्रमों तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में निजी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, चाय बागानों, बीड़ी उद्योग, जूट मिलों, पेपर मिलों और चीनी मिलों सहित अनेक क्षेत्रों के कर्मचारी आते हैं। संगठन का कहना है कि वे केंद्र या राज्य सरकार के पेंशनभोगी नहीं, बल्कि EPS-95 योजना के लाभार्थी हैं और उन्हें उसी के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
1995 में किए गए वादों का भी दिलाया गया याद
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने 1995 में EPS योजना लागू होने के समय जारी EPFO के प्रचार दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि उस समय योजना को सरकारी कर्मचारियों जैसी सामाजिक सुरक्षा देने वाला बताया गया था। प्रचार सामग्री में दावा किया गया था कि नई पेंशन व्यवस्था के तहत मिलने वाले लाभ सरकारी कर्मचारियों से कम नहीं होंगे, बल्कि कई मामलों में बेहतर होंगे। पेंशनर्स का आरोप है कि वर्तमान स्थिति उन वादों के बिल्कुल विपरीत है और इसलिए सरकार को अब ठोस निर्णय लेना चाहिए।
